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जमीन विवादों में फंसी एसईसीएल की खदानें… कहीं रोजगार का मुद्दा तो कहीं विस्तार के लिए चाहिए जमीनें…

  • केंद्रीय कोयला मंत्री ने मुख्यमंत्री छग से विवाद खत्म कराने के लिए कहा…

रायगढ़। एसईसीएल की कोयला खदानें भू-अर्जन विवादों में फंसती दिख रही हैं। इस वजह से कई बार उत्पादन और डिस्पैच भी रुक जाता है। अब मामला केंद्रीय कोयला मंत्रालय तक पहुंच गया है। केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री से एसईसीएल की खदानों के विवाद जल्द सुलझाने को कहा है। रायगढ़ जिले में एसईसीएल की कोयला खदानें कभी कोल माफिया की वजह से तो कभी भू-अर्जन विवादों के कारण सुर्खियों में रहती हैं। बरौद माइंस में प्रभावितों को रोजगार उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती है। आए दिन आंदोलनों की वजह से खदान लगातार नहीं चल पाती। इसी तरह जामपाली में कोल माफिया का दखल बढ़ता जा रहा है।

बिजारी में भी प्रभावितों को नौकरी देना एसईसीएल के लिए बड़ी समस्या पैदा कर रहा है। गारे पेलमा की एक माइंस का आवंटन जेएसपीएल को हो हुआ है। दूसरी माइंस अभी भी एसईसीएल की कस्टडी में है। छाल में भी ट्रांसपोर्टरों की वजह से कभी-कभी विवाद की स्थिति बनती है। एसईसीएल ने खदानों के संचालन में हो रही परेशानियों से केंद्रीय मंत्रालय को अवगत कराया था।

मिली जानकारी के मुताबिक केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री छग को पत्र लिखकर इन बाधाओं को दूर करने को कहा है। कोयला उत्पादन बढ़ सकता है लेकिन भूमि संबंधी विवादों के कारण ऐसा नहीं हो पा रहा है। दो एकड़ में ही मिलती है नौकरी एसईसीएल की कोयला खदानों में दो एकड़ पर एक प्रभावित को नौकरी देने का नियम है।
सीबी एक्ट के तहत होने वाले भू-अर्जन में ऐसा ही किया जाता है। लेकिन कई प्रभावित दो एकड़ से कम भूमि धारित करते हैं। ऐसे प्रभावितों को लाभ दिलाने के लिए घटते क्रम में नौकरी का आरक्षण किया जाता है, लेकिन क्षेत्र के बड़े किसान इसका विरोध करते हैं। इसी वजह से बिजारी में लंबे समय से विवाद खत्म नहीं हो रहा है।

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