छत्तीसगढ़

सभी के प्यार और सहयोग से राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव ने अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप लिया: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

सभी के प्यार और सहयोग से राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव ने अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप लिया: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

आदि संस्कृति, आदि दर्शन है- इसके बिना अस्तित्व अधूरा

राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का रंगा-रंग समापन

नृत्य की दोनों विधाओं में झारखण्ड के नर्तक दल रहे विजेता

मुख्यमंत्री ने किसान पंजीयन की तिथि को 10 नवम्बर तक बढ़ाने और राज्य में एक दिसम्बर से धान खरीदी की घोषणा की

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज रायपुर के साईंस कॉलेज मैदान में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के रंगा-रंग समापन समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि – आदिवासी संस्कृति, आदि दर्शन है। इसको आत्मसात करना होगा। इसको साथ लेकर आगे बढ़ना होगा। इसके बिना हमारा अस्तित्व पूरा नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन किया है, परन्तु यह आयोजन आप सबके प्यार और सहयोग से अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप ले लिया है। गीत-संगीत, नृत्य, वाद्य और वादन के जरिए एक नया समाज आकार लेता दिखाई पड़ रहा है। यह वह समाज है जो हाशिए पर रहा है। मुख्यमंत्री ने इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के सफल आयोजन के लिए प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से भागीदार रहे सभी लोगों का धन्यवाद और आभार जताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व केन्द्रीय मंत्री भक्त चरणदास ने की।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस अवसर पर राजीव गांधी किसान न्याय योजना के अंतर्गत किसानों के पंजीयन की तिथि को 31 अक्टूबर से बढ़ाकर 10 नवम्बर किए जाने तथा राज्य में एक दिसम्बर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इस आयोजन के जरिए हम सबने जनजातीय समाज की विविधता के दर्शन किए और साथ ही यह भी देखा और महसूस किया कि इनकी विविधता में भी कितनी समानता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इनकी कलाओं में एकरूपता है, क्योंकि यह प्रकृति से प्रेरणा लेते हैं। चाहे छत्तीसगढ़ का आदिवासी हो, या देश दुनिया के किसी कोने का, हमने यह देखा कि फसल कटाई और विवाह के अवसर पर यह उत्सव मनाते हैं और नृत्य करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस आयोजन के जरिए हमने सबको जोड़ने की कोशिश की है। लोगों को छत्तीसगढ़ आमंत्रित किया है कि वह छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला, पुरातन और समृद्ध संस्कृति, यहां के नैसर्गिक सौन्दर्य और परंपरा के बारे में जाने और उसे समझें। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले छत्तीसगढ़ की पहचान नक्सलगढ़ के रूप में थी, जो अब सुख-शांति के गढ़ के रूप में दिखाई दे रही है। इसका कोई जोड़ नहीं है। छत्तीसगढ़ की संस्कृति को एक नई पहचान देने की कोशिश हुई है। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर ‘पाड़ामुंतोम बस्तर’, ‘ऐतिहासिक जीत को सलाम’, राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव 2019 पर ‘कॉफी-टेबल बुक’ और ‘हमर संस्कृति, हमर तिहार’ पुस्तकों का विमोचन किया।

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Gopal Krishna Naik

Editor in Chief Naik News Agency Group

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