खरसिया क्षेत्र के छोटे दिल्ली में कार,हार्वेस्टर,बीमा का मामला पहुंचा थाने के दहलिज तक…
खरसिया।खरसिया क्षेत्र के छोटे दिल्ली से खबर निकल कर आ रहा है कि ग्राम बरभौना से केवल बीमा दावे का विवाद नहीं रह गया है,बल्कि यह ग्रामीण व्यवस्था,दस्तावेजी पारदर्शिता और आर्थिक शोषण पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है? दिवंगत किसान टेकचंद डनसेना की पत्नी जमुना डनसेना ने आरोप लगाया है कि उनके पति के नाम पर कथित रूप से फर्जी तरीके से बीमा कराया गया और नामिनी में किसी अन्य महिला का नाम दर्ज कर बीमा राशि हड़पने की तैयारी की गई।
दिवंगत किसान की धर्मपत्नी जमुना डनसेना के लिखित शिकायत के अनुसार उनके पति टेकचंद डनसेना गांव में रहकर कृषि कार्य करते थे। 16 दिसंबर 2025 को उनकी मृत्यु हो गई। उस समय श्रीमती जमुना डनसेना अपने मायके ओडिशा में थीं और उन्हें पति की मौत की जानकारी मोबाइल के माध्यम से मिली। अंतिम संस्कार भी उसी दिन गांव में कर दिया गया।
मामले ने तब नया मोड़ लिया जब परिवार को बताया गया कि दिवंगत किसान के नाम से एचडीएफसी से जुड़ा बीमा मौजूद है,लेकिन उसमें पत्नी के स्थान पर किसी अन्य महिला को नामिनी दर्शाया गया है।
दिवंगत किसान की धर्मपत्नी श्रीमती जमुना डनसेना ने आरोप लगाया है कि यह पूरा बीमा कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कराया गया और इसमें गांव के ही एक व्यक्ति की भूमिका रही, जिसने कथित रूप से जमानतदार बनकर प्रक्रिया को वैधता दिलाई।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि मृतक विवाहित था, तो फिर पत्नी को दरकिनार कर किसी अन्य महिला को नामिनी कैसे बनाया गया? ग्रामीण अशिक्षा और आर्थिक कमजोरी का फायदा उठाकर पूरा खेल किसने तैयार किया?
यह मामला केवल एक परिवार की आर्थिक लड़ाई नहीं, बल्कि उन हजारों ग्रामीण परिवारों की हकीकत को उजागर करता है जहां बीमा, बैंकिंग और वित्तीय योजनाओं के नाम पर दस्तावेजी हेरफेर की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। गांवों में अक्सर लोग हस्ताक्षर, फार्म और शर्तों की पूरी जानकारी के बिना कागजों पर भरोसा कर लेते हैं, जिसका फायदा कथित बिचौलिया तंत्र उठाता है।
दिवंगत किसान की धर्मपत्नी श्रीमती जमुना डनसेना ने बीमा कंपनी से मांग की है कि बीमा की राशि उन्हें दी जाए ताकि वे अपने दो बच्चों का पालन-पोषण कर सकें। उन्होंने अपने बयान को पूरी तरह सत्य बताते हुए जांच की मांग की है। गवाह के रूप में कमल प्रसाद डनसेना का नाम और मोबाइल नंबर भी प्रस्तुत किया गया है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि छाल थाना में कि गई आरोप पुलिस द्वारा सही पाए जाते हैं, तो यह केवल बीमा धोखाधड़ी का मामला नहीं रहेगा,बल्कि इसमें आपराधिक षड्यंत्र,दस्तावेजी फर्जीवाड़ा और आर्थिक शोषण जैसे गंभीर पहलू भी FIR हो सकता हैं।
ग्रामीण समाज में एक कहावत है — “गरीब आदमी की मौत से ज्यादा उसकी मजबूरी का सौदा होता है।”बरभौना का यह मामला उसी कड़वी सच्चाई को फिर सामने ला रहा है।



