
राबर्टसन।रायगढ़ जिले के चपले ग्राम की पावन धरा एक बार फिर आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक आस्था के विराट संगम की साक्षी बनने जा रही है।27 मई को दोपहर 03 बजे निकलने वाली भव्य कलश यात्रा,28 मई 2026 से 03 जून 2026 तक आयोजित होने जा रही श्री हनुमंत कथा केवल धार्मिक आयोजन भर नहीं, बल्कि बदलते समय में समाज को संस्कार, संयम और सनातन मूल्यों से जोड़ने का एक सशक्त प्रयास माना जा रहा है।
कथा वाचिका साध्वी राधिका किशोरी जी, श्रीधाम अयोध्या (उत्तर प्रदेश) से पहुंचकर भक्तों को श्री हनुमान चरित्र, भक्ति, सेवा और त्याग की अमृतमयी व्याख्या सुनाएंगी। वहीं कथा स्थल चपले में आध्यात्मिक वातावरण का निर्माण करेगी।
आज के दौर में, जब समाज तेजी से भौतिकता और प्रतिस्पर्धा की ओर बढ़ रहा है, ऐसे आयोजनों का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
हनुमंत कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं होती, यह व्यक्ति के भीतर छिपे साहस, समर्पण और कर्तव्यबोध को जागृत करने का माध्यम भी बनती है। भगवान हनुमान भारतीय चेतना में शक्ति और विनम्रता के अद्भुत संतुलन के प्रतीक माने जाते हैं—जहाँ बल है, वहाँ सेवा भी है; जहाँ पराक्रम है, वहाँ मर्यादा भी।
ग्रामीण अंचलों में होने वाले इस प्रकार के आयोजन सामाजिक एकता को भी नई ऊर्जा देते हैं। कथा पंडाल केवल श्रद्धा का केंद्र नहीं बनता, बल्कि वह संवाद, सहयोग और सांस्कृतिक समरसता का मंच भी बन जाता है। गाँव, क्षेत्र और समाज के लोग एक सूत्र में बंधते हैं, पीढ़ियाँ जुड़ती हैं और लोक संस्कृति जीवंत होती है।
यह आयोजन ऐसे समय में हो रहा है, जब समाज मानसिक तनाव, सामाजिक विखंडन और सांस्कृतिक दूरी जैसी चुनौतियों से गुजर रहा है। ऐसे में धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन सामूहिक चेतना को सकारात्मक दिशा देने का कार्य करते हैं।
हनुमंत कथा के माध्यम से युवाओं को अनुशासन, निष्ठा और राष्ट्रधर्म का संदेश भी अप्रत्यक्ष रूप से प्राप्त होता है।
आयोजक श्रीवास परिवार एवं समस्त ग्रामवासी चपले द्वारा किए जा रहे इस आयोजन को लेकर क्षेत्र में उत्साह का वातावरण देखा जा रहा है। ग्रामीण स्तर पर इस प्रकार की सहभागिता यह भी दर्शाती है कि भारतीय समाज की जड़ें आज भी अपनी परंपराओं से गहराई से जुड़ी हुई हैं।
संभव है कि आने वाले दिनों में यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित न रहकर क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान के रूप में भी स्थापित हो। क्योंकि जहाँ कथा होती है, वहाँ केवल शब्द नहीं गूंजते—वहाँ समाज की आत्मा बोलती है।




