छत्तीसगढ़ के तिहार,पोला आज होही बैइला के पूजा


खेत में महत्व भूमिका निभाने वाले बैलों को सम्मान देने के लिए मनाया जाने वाला पोला पर्व इस साल आज सोमवार को श्रद्धा-उल्लास से मनाया जाएगा। कोरोना महामारी के चलते इस साल असली बैलों की दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन नहीं किया जा रहा है, गली-मोहल्लों में बच्चे मिट्टी के बैल दौड़ाने का आनंद लेंगे। रावणभाठा मैदान (भाटागांव) में हर साल होने वाली बैल दौड़ प्रतियोगिता इस साल नहीं होगी, केवल बैलों की पूजा-अर्चना करके छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का भोग लगाएंगे।
इस मौके पर बैल मालिकों को सम्मानित किया जाएगा। श्री कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव एवं विकास समिति के अध्यक्ष माधव लाल यादव और सचिव धन्नू लाल देवांगन ने बताया कि इस साल कोरोना महामारी के कारण प्रशासन ने बैल दौड़ प्रतियोगिता आयोजित करने की अनुमति नहीं दी है। समिति ने निर्णय लिया है कि बैल दौड़ एवं बैल श्रृंगार प्रतियोगिता नहीं कराई जाएगी।
सदियों से चली आ रही परंपरा का पालन करते हुए केवल बैलों की पूजा करके बैल मालिक किसानों का सम्मान करेंगे। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री एवं दक्षिण विधायक बृजमोहन अग्रवाल, महापौर एजाज ढेबर, गोसेवा आयोग के अध्यक्ष महंत रामसुंदरदास, पार्षद सतनाम सिंह पनाग किसानों को सम्मानित करेंगे।
पोला पर्व के एक दिन पहले शास्त्री बाजार,गोल,बाजार,आमापारा,गुढ़ियारी,पुरानी बस्ती आदि इलाकों में मिट्टी के नांदिया बैल और रसोई घर में उपयोग में आने वाले मिट्टी के बर्तन वाले खिलौने खरीदने महिलाओं की भीड़ दिखाई दी। बच्चे अपनी पसंद के मिट्टी के नांदिया और खिलौने खरीदने माता-पिता के साथ पहुंचे। बैलों की जोड़ी और उसे चलाने के लिए पहिये 40 से 100 रुपये तक बिके।
पोला पर्व के दो दिन बाद सुहागिनों द्वारा मनाया जाने वाला तीजा पर्व 9 सितंबर को मनाया जाएगा। तीजा मनाने के लिए पोला पर्व के बाद मंगलवार से विवाहित बेटियों का ससुराल से मायके आने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। तीजा पर पूजा करने के लिए महिलाएं नई साड़ियां,श्रृंगार सामग्री,जेवर की खरीदारी करती हैं। इसे देखते हुए बाजार में रौनक दिखाई देने लगी है।




