एक कदम प्रकृति की ओर: सीड बॉल अभियान में अघरिया समाज के नारी शक्ति ने बोए हरित भविष्य के बीज…

रायगढ़। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर अघरिया सदन रायगढ़ में आयोजित “एक कदम प्रकृति की ओर – सीड बॉल निर्माण अभियान” केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति सामाजिक उत्तरदायित्व और जन-जागरण का सशक्त संदेश बनकर उभरा। नारी शक्ति की सक्रिय भागीदारी से सम्पन्न इस आयोजन ने पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वर देने का प्रयास किया, जहाँ विचारों के साथ-साथ धरती को हराभरा बनाने की ठोस पहल भी दिखाई दी।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ प्रारंभ हुए कार्यक्रम में पर्यावरण सचिव गोपाल पटेल ने विश्व पर्यावरण दिवस की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए प्रकृति और मानव जीवन के अटूट संबंध को रेखांकित किया। इसके बाद वक्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए।
केन्द्रीय सचिव भोजराम पटेल ने “क्षिति, जल, पावक, गगन, समीरा – पंच तत्व यह अधम शरीरा” का उल्लेख करते हुए कहा कि मानव अस्तित्व प्रकृति के संतुलन पर आधारित है। उन्होंने जन्मदिन, वैवाहिक वर्षगांठ और अन्य पारिवारिक अवसरों पर कम से कम एक पौधा लगाने का आह्वान किया। उनके उद्बोधन ने पर्यावरण संरक्षण को व्यक्तिगत जिम्मेदारी से जोड़ने का प्रभावी संदेश दिया।
कार्यक्रम में साहित्य और संवेदना का भी सुंदर संगम देखने को मिला। शिक्षिका श्रीमती लीशा पटेल, श्रीमती सीमा पटेल और रश्मि चौधरी ने अपनी कविताओं के माध्यम से प्रकृति के प्रति प्रेम और संरक्षण का संदेश दिया। वहीं केन्द्रीय उपाध्यक्ष श्रीमती सुषमा प्रकाश नायक ने पेड़ों की बहुआयामी उपयोगिता को रेखांकित करते हुए बताया कि वृक्ष केवल छाया या फल देने वाले जीव नहीं, बल्कि जीवन के आधार स्तंभ हैं।
पी.डी. कॉमर्स कॉलेज की प्राध्यापक प्रो. हेमकुमारी पटेल ने बढ़ते प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग के संदर्भ में व्यापक वृक्षारोपण की आवश्यकता पर जोर दिया। योग प्रशिक्षिका शर्मिला नायक ने पीपल, नीम, तुलसी, बरगद और आंवला जैसे पंचवृक्षों के आध्यात्मिक, औषधीय और पर्यावरणीय महत्व को विस्तार से समझाया।
जब संकल्प बना अभियान
कार्यक्रम का सबसे प्रेरणादायी पक्ष सीड बॉल निर्माण कार्यशाला रही। केन्द्रीय पर्यावरण सचिव गोपाल पटेल ने गोबर, मिट्टी और बीजों से सीड बॉल तैयार करने की विधि का प्रदर्शन किया। इसके बाद उपस्थित महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने सामूहिक रूप से सीड बॉल तैयार किए और वर्षा ऋतु में इन्हें उपयुक्त स्थानों पर वितरित एवं प्रसारित करने का संकल्प लिया।
“आज का एक सीड बॉल, कल एक हरा-भरा भविष्य” तथा “जय अघरिया श्री कन्हैया – हरिहर रहे धरती मैया” जैसे नारों के साथ उपस्थित जनों ने पर्यावरण संरक्षण की सामूहिक प्रतिज्ञा दोहराई। यह संकल्प केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं था, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और संतुलित पर्यावरण छोड़ने की प्रतिबद्धता का प्रतीक था।
नारी शक्ति बनी परिवर्तन की वाहक
इस अभियान में महिलाओं की उल्लेखनीय सहभागिता ने यह सिद्ध किया कि पर्यावरण संरक्षण की लड़ाई में नारी शक्ति अग्रिम पंक्ति में खड़ी है। बड़ी संख्या में महिलाओं, युवतियों और बच्चों ने सीड बॉल निर्माण में भाग लेकर हरित भविष्य के निर्माण का संदेश दिया। उनकी सक्रियता ने कार्यक्रम को सामाजिक चेतना और सामूहिक सहभागिता का सशक्त स्वरूप प्रदान किया।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सार्थक पहल
आभार प्रदर्शन करते हुए केन्द्रीय उपाध्यक्ष श्रीमती कमला पटेल ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण किसी एक व्यक्ति या संस्था का कार्य नहीं, बल्कि सामूहिक उत्तरदायित्व है। उन्होंने महिलाओं को इस अभियान में अग्रणी भूमिका निभाने का आह्वान करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे छोटे-छोटे प्रयास भविष्य में हरित, स्वच्छ और समृद्ध समाज की नींव बनेंगे।
कार्यक्रम में इन सब की रही सक्रिय भागीदारी :
एक कदम प्रकृति की ओर सीड बॉल निर्माण अभियान कार्यक्रम में जहां महिला सदस्यों की उत्साहजनक भागीदारी रही जिसमें श्रीमती श्वेत कुंवर श्रीमती भोजकुंवर , श्रीमती निर्मला, सावित्री, सुनीता , उत्तरा , प्रेमलता , बसंती , रजनी , सरस्वती , खुशी , पद्मनी, चंद्रकला , नर्मदा, अनिता, नूतन,मेघा , सरिता , छाया , सरिता , गिरिजा चौधरी, कु. प्रतीची , कु.श्रद्धा, कु.रितिका, कु.माही, कु.सिद्धि, मास्टर मनन , कुशाग्र, शिवम् एवं मुकुन्द की सक्रिय भागीदारी रही।

विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित यह अभियान स्पष्ट संदेश देता है कि यदि समाज जागरूकता को संकल्प और संकल्प को कर्म में बदल दे, तो प्रकृति संरक्षण का लक्ष्य दूर नहीं। अघरिया सदन रायगढ़ से शुरू हुई यह हरित पहल आने वाले समय में जनभागीदारी आधारित पर्यावरण आंदोलन का स्वरूप ग्रहण कर सकती है।




