
✍️नरेन्द्र पटेल @खरसिया।अखिल भारतीय अघरिया समाज, खरसिया क्षेत्र द्वारा आयोजित बाल सभा का सफल आयोजन मंगलवार को रानीसागर स्थित अघरिया भवन में सम्पन्न हुआ। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम त्रिभुवन पटेल के निवास पर आयोजित होना था, किन्तु पारिवारिक स्वास्थ्यगत कारणों के चलते कार्यक्रम का स्थल परिवर्तित कर अघरिया भवन किया गया। कार्यक्रम समाज की केंद्रीय अध्यक्ष उषा पटेल की विशिष्ट उपस्थिति तथा खरसिया क्षेत्रीय अध्यक्ष हेमंत पटेल की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम में वरिष्ठ संरक्षक सम्माननीय बालकराम पटेल,केंद्रीय महिला संयोजिका तारेश्वरी नायक,केंद्रीय कोषाध्यक्ष प्रमोद पटेल, केंद्रीय सचिव भोजराम पटेल,सह सचिव घनश्याम पटेल,पर्यावरण सचिव गोपाल पटेल, युवा सह संयोजक पवन पटेल,खीर नायक क्षेत्रीय पदाधिकारी,पूर्व पदाधिकारी और समाजजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ समाज के आराध्य भगवान श्री कृष्ण की पूजा-अर्चना से हुआ। इसके पश्चात अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं पुष्पहार से स्वागत किया गया।

अपने स्वागत उद्बोधन में हेमंत कुमार पटेल ने अल्प समय में सूचना मिलने के बावजूद उपस्थित समाजजनों और अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज की सक्रियता और सहभागिता ही संगठन की वास्तविक शक्ति है। उन्होंने कार्यक्रम की सफलता में योगदान देने वाले सभी सहयोगियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

केंद्रीय महिला संयोजिका श्रीमती तारेश्वरी नायक ने सामाजिक संगठनों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि खरसिया क्षेत्र सामाजिक जागरूकता के लिए जाना जाता है,किन्तु महिला उपस्थिति को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में सामूहिक प्रयास अपेक्षित हैं।

रायगढ़ ग्रामीण क्षेत्र के अध्यक्ष राजेश नायक ने अपने विचार रखते हुए कहा कि नियमित सामाजिक गतिविधियां ही संगठन को जीवंत बनाए रखती हैं। उन्होंने समाजजनों से सामाजिक कार्यों में सक्रिय भागीदारी और उदार सहयोग का आह्वान किया।

केंद्रीय कोषाध्यक्ष प्रमोद पटेल ने समाज की संस्थागत मजबूती के लिए आर्थिक सहयोग की महत्ता पर प्रकाश डाला। वहीं केंद्रीय सचिव भोजराम पटेल ने पारदर्शिता,निःस्वार्थ सेवा और संगठनात्मक विश्वास को सामाजिक विकास का आधार बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में संगठित समाज ही अपनी पहचान और अधिकारों को प्रभावी रूप से स्थापित कर सकता है।

वरिष्ठ संरक्षक बालक राम पटेल ने अपने दीर्घ सामाजिक अनुभव साझा करते हुए कहा कि अघरिया समाज को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सशक्त पहचान दिलाने के लिए उसके स्वरूप और गतिविधियों का विस्तार आवश्यक है। उन्होंने सभी वर्गों को साथ लेकर आगे बढ़ने का संदेश दिया।

मुख्य अतिथि केंद्रीय अध्यक्ष श्रीमती उषा पटेल ने अपने उद्बोधन में शहीद नंद कुमार पटेल को स्मरण करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन और प्रेरणा ने उन्हें सामाजिक एवं सार्वजनिक जीवन में आगे बढ़ने का अवसर दिया।
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उन्होंने कहा कि अघरिया समाज कृषि क्षेत्र के साथ-साथ व्यवसाय,उद्योग, प्रशासन,राजनीति और अन्य क्षेत्रों में भी अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है।

उन्होंने समाज की श्रमशील परंपरा को उसकी सबसे बड़ी पूंजी बताते हुए कहा कि इस गौरवशाली पहचान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है। पैता धाम निर्माण का उल्लेख करते हुए उन्होंने समाजजनों से विश्वास और सहभागिता को पुनर्स्थापित करने का आह्वान किया, ताकि इस महत्वपूर्ण परियोजना को व्यापक जनसहयोग प्राप्त हो सके।
श्रीमती उषा पटेल ने समय-समय पर कृषि, व्यापार, युवा उद्यमिता और सामाजिक नेतृत्व से जुड़े विशेष सम्मेलनों के आयोजन की आवश्यकता भी रेखांकित की। उन्होंने समाजसेवी स्वर्गीय डॉ. शक्रराजीत नायक के योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
अपने संबोधन में उन्होंने खरसिया विधायक उमेश पटेल के सामाजिक एवं राजनीतिक योगदान की सराहना की तथा रायगढ़ विधायक, प्रदेश के वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी और सांसद रूपकुमारी चौधरी को अघरिया समाज की उपलब्धियों और प्रतिनिधित्व के उदाहरण के रूप में उल्लेखित किया।

बाल सभा में पूर्व अध्यक्ष त्रिभुवन पटेल, अवधराम पटेल,रामाधार पटेल,भोला शंकर पटेल, चंद्रिका पटेल, हेमन्त कुमार पटेल अध्यक्ष, गोपाल कृष्ण नायक “देहाती”,नेतराम पटेल,शोभेंद्र पटेल,नरेन्द्र पटेल सचिव,सह मीडिया प्रभारी,राजकुमार पटेल, हीरालाल पटेल,कृष्णचंद्र पटेल,योगित पटेल,विशेश्वर पटेल,घासीराम पटेल, डोल नारायण नायक, भुवन पटेल, खिलेश्वर नायक, मोहरसाय पटेल, उमेश पटेल, रामचरण पटेल, महेंद्र पटेल, बालेश्वर पटेल, रेशमलाल पटेल, भरत पटेल, संतोष पटेल, बाबूलाल पटेल, मकरध्वज पटेल, रामकुमार पटेल, ईश्वर पटेल, भैया राम नायक,मितेश नायक,सहित अनेक समाजजनों की सक्रिय भागीदारी रही।

सामाजिक एकता,युवा पीढ़ी के संस्कार निर्माण,महिला सहभागिता, संगठनात्मक पारदर्शिता और सामुदायिक विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर विमर्श का मंच बना। वक्ताओं ने एक स्वर में समाज को संगठित, जागरूक और भविष्य की चुनौतियों के प्रति तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया।



