आने को है मानसून : छत्तीसगढ़ के 10 जिलों में खुले में पड़ा है 400 करोड़ का धान…

छत्तीसगढ़ में प्री मानसून की बारिश शुरू होने वाली है, लेकिन लाखों क्विंटल धान खुले में पड़ा है। अकेले धमतरी जिले में छह लाख क्विंटल से ज्यादा धान का उठाव नहीं हुआ है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्री- मानसून की बारिश शुरू होने वाली है, लेकिन लाखों क्विंटल धान खुले में पड़ा है। अकेले धमतरी जिले में छह लाख क्विंटल से ज्यादा धान का उठाव नहीं हुआ है। बस्तर संभाग के सात जिले और दुर्ग राजनांदगांव को शामिल करें तो 10 जिलों में करीब पौने चार सौ करोड़ रुपए का धान संग्रहण केंद्रों में रखा हुआ है।
संबंधित अधिकारियों का दावा है कि, धान को ढंककर रखा गया है, इसलिए व्यापक नुकसान की आशंका नहीं है, लेकिन मैदानी हकीकत पूरी तरह इससे मेल नहीं खाता। कई इलाकों में धान को खुला ही छोड़ दिया गया है।
धमतरी के संग्रहण केंद्रों में 6.20 लाख क्विंटल धान
प्री-मानसून गतिविधियां शुरू हो गई हैं। मौसम विभाग रोज आंधी-बारिश की संभावना जता रहा है। ऐसे में जिले के संग्रहण केन्द्रों का इस संवाददाता ने जायजा लिया जहां लाखों क्विंटल धान का संग्रहण है। ट्रकों से धान का उठाव जारी है। धान को सुरक्षित रखने के भी उपाय किए गए हैं।
पिछले 10 साल से धान में नुकसान का कोई आंकड़ा नहीं है
डीएमओ सुनील सिंह राजपूत ने बताया कि, जिले में 4 धान संग्रहण केन्द्र हैं। जहां 6 लाख 20 हजार 127 क्विंटल धान शेष है। 15 लाख 66 हजार 291.55 क्विंटल धान का उठाव कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि सभी संग्रहण केन्द्र में धान की छल्लियों को बारिश से सुरक्षित रखने कैप कव्हर से ढंका गया है। पिछले 10 साल से धान में नुकसान का कोई आंकड़ा नहीं है। बारिश से पहले ही संग्रहण केन्द्रों से धान का उठाव कर लिया जाता है।
बस्तर में 42 हजार टन से ज्यादा धान
जगदलपुर। मानसून आने को है लेकिन धान संग्रहण केन्द्रों में अभी भी 42 हजार टन धान का उठाव नहीं होने से असुरक्षित पड़े हैं। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का अभियान समाप्त हुए लगभग छह माह बीत चुके हैं, लेकिन धान का उठाव नहीं हुआ है। बस्तर संभाग में खरीदे गए धान का लगभग 79 प्रतिशत उठाव हुआ है।
करोड़ों रुपए का धान खराब होने की आशंका
आंकड़ों के अनुसार, सातों जिलों में 15 लाख 18 हजार 521 टन की धान खरीदी गई, जिसमें से 13 लाख 32 हजार 325.26 टन धान का उठाव हुआ। यदि उठाव नहीं हुआ तो करोड़ों रुपए का धान खराब होने की आशंका है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, शासन ने धान खरीदी के बाद 31 मार्च तक धान का उठाव करने के निर्देश दिए थे, लेकिन विपणन अधिकारी की बातों को मिलर्स नहीं मान रहे हैं। इसलिए अब तक धान का उठाव नहीं हो सका है।
ज्यादा दिनों तक खुले में रहा तो नमी और फफूंद का खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक भंडारित धान में नमी, फफूंद, रंग परिवर्तन, वजन में कमी तथा गुणवत्ता प्रभावित होने जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
शीघ्र होगा धान का उठाव
बस्तर जिला विपणन अधिकारी आरके ध्रुव ने उम्मीद जताई है कि शेष बचे धान का जल्द ही उठाव हो जाएगा। धान को सुरक्षित करने के लिए तालपत्री से ढंक दिया गया है, जिससे बारिश में भी धान खराब नहीं होगा।
दुर्ग जिले के संग्रहण केंद्रों में 17 हजार मीट्रिक टन धान खुले में
भिलाई। दुर्ग जिले के संग्रहण केंद्रों में 17 हजार मीट्रिक टन धान का उठाव नहीं हो पाया है। सेलूद, अरसनारा, कोड़िया और जेवरा सिरसा संग्रहण केंद्रों में ये धान रखे हुए हैं। मानसून आने को है और अब तक धान संग्रहण केंद्रों से धान का उठाव नहीं किया गया है। धान खरीदी के बाद फरवरी तक धान संग्रहण केंद्रों से धान का उठाव हो जाना चाहिए था लेकिन रफ्तार बेहद सुस्त है।
विपणन संघ ने 130 राइस मिलरों से धान उठाव के लिए किया है अनुबंध
विपणन संघ ने 130 राइस मिलरों से धान उठाव के लिए अनुबंध किया है। दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने बारिश करीब होने को देखते हुए संग्रहण केंद्रों से धान उठाव के लिए 15 जून की तिथि मुकर्रर की है। साथ ही चारों धान संग्रहण केंद्रों में अभी से ही धान की सुरक्षा के लिए कैप कवर भी स्टॉक किए गए हैं। ताकि प्री मानसून की बारिश में भी धान को सुरक्षित किया जा सके। हर रोज 2 हजार मीट्रिक टन धान का उठाव हो रहा है। इस हिसाब से 9 दिनों में संग्रहित पूरा धान का उठाव होने का दावा प्रशासन ने किया है।
मार्च में ही उठ गया धान
राजनांदगांव। खरीफ वर्ष 2025-26 के तहत राजनांदगांव जिले में करीबन 62 लाख क्विंटल धान की खरीदी की गई थी। सवा लाख से अधिक किसानों से खरीदे गए इस धान का उठाव भी युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया था। जिसका असर रहा कि जिले में मार्च महीने के अंतिम सप्ताह तक शत-प्रतिशत धान का उठाव कर लिया गया था। उठाव के लिए जिले के ही 81 से अधिक राइस मिलर्स से अनुबंध किया गया था।




