06 जून से 11 जून तक रहेगा मृत्यु पंचक, धार्मिक कार्यों में बरतने की दी जा रही सावधानी
रायगढ़/खरसिया, 06 जून। ज्योतिषीय गणना के अनुसार 06 जून 2026 से 11 जून 2026 तक मृत्यु पंचक का योग रहेगा। हिंदू धर्म और वैदिक ज्योतिष में पंचक काल को विशेष महत्व दिया गया है तथा इस अवधि में कुछ कार्यों को लेकर सावधानी बरतने की परंपरा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मृत्यु पंचक के दौरान विशेष रूप से अंतिम संस्कार और उससे जुड़े कर्मकांडों में विधि-विधान का पालन आवश्यक माना जाता है।
क्या है मृत्यु पंचक?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब चंद्रमा क्रमशः धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों में भ्रमण करता है, तब पंचक काल बनता है। पंचक के पांच प्रकार बताए गए हैं, जिनमें मृत्यु पंचक को अपेक्षाकृत अधिक संवेदनशील माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों में वर्णित मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में होने वाली मृत्यु पर विशेष शांति विधान और पूजन की परंपरा है।
धार्मिक मान्यता और सावधानियां
विद्वानों के अनुसार मृत्यु पंचक के दौरान यदि किसी व्यक्ति का निधन होता है तो अंतिम संस्कार के समय विशेष उपाय और शांति कर्म कराए जाते हैं। हालांकि यह विषय पूरी तरह धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़ा हुआ है। सामान्य जनजीवन, सामाजिक गतिविधियों और दैनिक कार्यों पर इसका कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ता।
ज्योतिषाचार्यों की राय
ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि पंचक काल भय का नहीं बल्कि सतर्कता और धार्मिक नियमों के पालन का विषय है। किसी भी प्रकार की अफवाह या भ्रांति से बचते हुए योग्य आचार्य अथवा पुरोहित के मार्गदर्शन में धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करना उचित माना जाता है।
06 जून कि ढ़लती शाम से 11 जून 2026 तक रहने वाले मृत्यु पंचक को लेकर धार्मिक समुदायों में जागरूकता देखी जा रही है। श्रद्धालुओं को परंपराओं का सम्मान करते हुए संयम, श्रद्धा और विधि-विधान के साथ धार्मिक कार्य संपन्न करने की सलाह दी जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उचित उपाय और शांति कर्म के साथ पंचक काल में भी सभी संस्कार संपन्न किए जा सकते हैं।
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