रायगढ़

गिलोए खरीदी में रायगढ़ रहा टॉप पर

गिलोए खरीदी की रैंकिंग में रायगढ़ रहा टॉप परप्रदेश भर में रायगढ़ वन मंडल ने सबसे अधिक खरीदी की, मुख्यालय में भेजा जाएगा

रायगढ़। प्रदेश भर में कई प्रकार के वनोपज की खरीदी की जाती थी, पर इस बार कोरोना के संक्रमण को देखते हुए लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए वन विभाग के द्वारा गिलोए की भी खरीदी की गई। महिला स्व सहायता के माध्यम से रायगढ़ वन मंडल में इसकी खरीदी हुई और गिलोए खरीदी के मामले में अक्टूबर 2020 से बीस मार्च तक प्रदेश भर में रायगढ़ वन मंडल टॉप पर है। अब यहां खरीदी किए गए गिलोए को मुख्यालय भेजा जाएगा। इसके बाद आगे की प्रक्रिया पूरी कर इसकी बिक्री मार्केट में होगी।

विदित हो कि वर्ष 2020 में कोरोना का ऐसा प्रकोप देखा गया कि पूरे भारत भर में लॉकडाउन हो गया। यही नहीं छत्तीसगढ़ में भी इसका काफी असर देखने को मिला। ऐसे में यह बात भी सामने आयी कि कोरोना से बचने के लिए लोगों को अपना इम्युनिटी को बढ़ाना होगा। इसके बाद कई प्रकार के चुर्ण, आयुर्वेदिक व अन्य दवा का इस्तेमाल किया गया। वहीं इस बीच लोगों को गिलोए की भी जानकारी हुई और गिलोए का प्रचलन लोगों के बीच बढ़ भी गया। कोई चूर्ण के रूप में इसकी खरीदी कर रहा था, तो कोई इसे गांव व जंगल से ला रहा था। गिलोए के कई गुणों को देखते हुए वन विभाग के द्वारा प्रदेश भर में इसकी पहली बार खरीदी भी की गई। इससे पहले हर्रा, बेहड़ा सहित अन्य प्रकार के वनोपज की खरीदी होती थी, पर इस वर्ष सभी वन मंडलो में इसकी खरीदी की गई। ऐसे में रायगढ़ वन मंडल पूरे प्रदेश भर में खरीदी की रैंकिंग में पहले स्थान पर रहा है। दूसरे स्थान पर बालौद तीसरे स्थान पर व धमतरी रही है।

पहली बार प्रदेश भर में हुई खरीदी

गिलोए की खरीदी प्रदेश में पहली बार हुई है और इसमें रायगढ़ रैंकिग में सबसे आगे रहा है। बताया जा रहा है कि महिला स्वसहायता समूह के माध्यम से इसकी खरीदी की गई। अक्टूबर 2020 से बीस मार्च तक कुल 1076.30 क्विटंल गिलोए की खरीदी हुई। इसमें बरमकेला के झिंकीपाली से 25 क्वि., तौसिर से 85 क्वि., बरमकेला से 390.20 क्वि., करणपाली 50 क्वि., बिरनीपाली 26 क्वि., मल्दा से 500 क्वि.दस केजी गिलोए की खरीदी की गई।

गिलोए से दूरी होती है कई बीमारी

विभागीय जानकारों ने बताया कि गिलोए का इस्तेमाल कई बिमारियों को दूर भगाने के लिए होता है। बताया जा रहा है कि सुबह इसका खाली पेट काड़ा पीने से सर्दी, खांसी व बुखार नहीं होते हैं और यह बॉडी पर अन्य तरह के फायदे भी पहुंचाते हैं। इसी वजह से कोरोना काल में गिलोए का महत्व पहले से अधिक बढ़ गया।

Show More

Gopal Krishna Naik

Editor in Chief Naik News Agency Group

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!