
खरसिया। विधानसभा क्षेत्र के किसान आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित,बानीपथर में शनिवार के सुबह से किसानों की भीड़ लगी रही।

धान की फसल के लिए इस समय यूरिया खाद की सबसे अधिक आवश्यकता बताई जा रही है। किसान समिति में आए किसानों ने स्पष्ट कहा कि अगर समय पर पर्याप्त यूरिया नहीं मिला तो उनकी मेहनत पर पानी फिर सकता है।

किसानों ने बताया कि सरकार बड़े-बड़े दावे तो करती है कि खाद की कोई कमी नहीं है, मगर वास्तविकता यह है कि यूरिया लेने के लिए उन्हें घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है। कई किसानों का आरोप है कि मांग के हिसाब से आपूर्ति बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं है।

हालांकि समिति प्रबंधक जनक राम पटेल ने बताया कि शासन से निर्धारित मात्रा में खाद मिलते ही वितरण प्राथमिकता से किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि शनिवार को 670 बोरा यूरिया उपलब्ध कराया गया, जिसे प्रति एकड़ दो बोरे की सीमा तय कर किसानों में बांटा गया।

लेकिन किसानों का कहना है कि यह मात्रा उनकी फसल की जरूरतों के मुकाबले बहुत कम है। “धान की खेती के इस अहम समय में अगर हमें पूरा यूरिया नहीं मिला, तो पैदावार घट जाएगी,” एक किसान ने चिंता जताई।

👉 यह स्थिति साफ दर्शाती है कि सरकार के ‘पर्याप्त खाद उपलब्ध’ होने के दावे और किसानों की जमीनी सच्चाई में बड़ा फर्क है।
सवाल यह है कि किसानों को वाजिब समय पर पूरा खाद कब और कैसे मिलेगा?



