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अध्यक्ष चुनावी संग्राम: अखिल भारतीय अघरिया समाज में वादों की कसौटी पर निर्णायक होंगे संरक्षक सदस्य…

रायगढ़। अखिल भारतीय अघरिया समाज के केन्द्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर घमासान तेज हो गया है।

इस बार चुनावी संग्राम में प्रमुख उम्मीदवार डी.डी. पटेल ने अपनी “त्रिशूल छाप” को समर्थन देने की अपील करते हुए “फ्री पॉलिटिक्स” की परिकल्पना को अपने प्रचार अभियान का प्रमुख मुद्दा बनाया है।

क्या है ‘फ्री पॉलिटिक्स’?

डी.डी. पटेल ने अपने प्रचार अभियान के दौरान समाज को पारदर्शी नेतृत्व प्रदान करने का वादा किया है। “फ्री पॉलिटिक्स” का मतलब है समाज के निर्णयों में निष्पक्षता, बिना किसी व्यक्तिगत स्वार्थ और भेदभाव के कार्य करना। उनका कहना है कि यह नीति समाज के युवाओं को प्रेरित करने और विकास कार्यों को गति देने का आधार बनेगी।

त्रिशूल छाप की चुनौती:

डी डी पटेल की “त्रिशूल छाप” को इस बार समाज के युवा, युवती और बुजुर्ग महिला पुरुष दोनों वर्गों से समर्थन मिलने की उम्मीद है। वहीं, उनके विरोधी प्रत्याशी भी अपने-अपने एजेंडों के साथ मैदान में हैं। लेकिन क्षेत्र के संरक्षक सदस्यों के साथ वर्तमान पदाधिकारीयों की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है,क्योंकि वे समाज में गहरी पैठ रखते हैं और उनके निर्णय से चुनाव का रुख तय होगा।

संरक्षक सदस्यों की प्राथमिकता:

अखिल भारतीय अघरिया समाज के संरक्षक सदस्यों का कहना है कि इस बार वादों और घोषणाओं से ज्यादा कार्यों की ठोस योजना और उनके क्रियान्वयन की क्षमता पर भरोसा किया जाएगा।  खरसिया क्षेत्र के कई संरक्षकों ने कहा कि वे डी डी पटेल के नेतृत्व का समर्थन करेंगे जो समाज की मूलभूत समस्याओं को सुलझाने और संगठन को एकजुट करने में सक्षम हैं।

चुनावी समीकरण:

डी.डी. पटेल के “फ्री पॉलिटिक्स” के वादे ने युवाओं को आकर्षित किया है, लेकिन क्या यह वादा संरक्षक सदस्यों को भी भरोसे में ले सकेगा? यह देखना बाकी है। चुनावी माहौल में बढ़ते उत्साह के बीच, 12जनवरी को होने वाले मतदान का सभी को बेसब्री से इंतजार है।

समाज का निर्णय:

अघरिया समाज के केन्द्रीय अध्यक्ष के इस चुनावी संग्राम का परिणाम न केवल समाज के भविष्य को प्रभावित करेगा, बल्कि नेतृत्व के प्रति सदस्यों की अपेक्षाओं और विश्वास का भी परिचायक होगा।

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Gopal Krishna Naik

Editor in Chief Naik News Agency Group

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