
खरसिया।थाना खरसिया क्षेत्र के ग्राम बानीपाथर स्थित मंगल कार्बन कारखाने में 05 फरवरी 2026 की सुबह फर्नेस से आग बाहर निकलने की घटना में एक ही परिवार के कई सदस्यो, एक 09 माह की बच्ची सहित, गंभीर रूप से झुलस गए। पीड़ितों को एंबुलेंस से अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
मामले में कारखाना प्रबंधन के विरुद्ध बीएनएस की धाराओं 125(ए), 125(बी), 287, 288, 289 एवं 3(5) के तहत अपराध दर्ज करने की मांग की गई है।
आवेदिका आशा बाई खड़िया के अनुसार वह अपने परिवार और अन्य श्रमिकों के साथ पिछले कुछ माह से कारखाने में कार्यरत थीं। रोज़ की तरह घटना-दिन भी काम शुरू हुआ। फर्नेस का ढक्कन खोले जाने के दौरान अचानक दबाव के साथ आग बाहर निकली। उस समय आस-पास मौजूद मजदूर—शिव खड़िया, उदासिनी बाई (नवजात भूमि सहित), साहेबलाल खड़िया, कौशल पटेल, इंदीवर तथा प्रिया सारथी—आग की चपेट में आ गए।
फर्नेस को बिना पर्याप्त ठंडा किए और बिना सुरक्षा उपकरणों के खोला गया। पुराने टायरों को पिघलाकर तेल निकालने की प्रक्रिया उच्च तापमान और जोखिमपूर्ण मानी जाती है, जहां मानक संचालन प्रक्रियाओं और व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों का कड़ाई से पालन आवश्यक है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह औद्योगिक सुरक्षा मानकों के उल्लंघन और प्रबंधकीय लापरवाही का गंभीर मामला बनता है।
हादसे ने स्थानीय औद्योगिक इकाइयों में श्रमिक सुरक्षा, प्रशिक्षण और निगरानी पर सवाल खड़े किए हैं। एक ही परिवार के कई सदस्यों के झुलसने से सामाजिक-आर्थिक प्रभाव भी सामने आया है। मामले में कारखाने के मुख्य प्रबंधक रूपेश शर्मा और प्रबंधक प्रेमसागर त्रिपाठी उर्फ दादु महाराज को जिम्मेदार ठहराते हुए सख़्त कार्यवाही की मांग की गई है।
पुलिस और औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग की जांच से यह स्पष्ट होगा कि सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन हुआ या नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर न केवल दंडात्मक कार्यवाही,बल्कि जोखिम मूल्यांकन, मशीनरी ऑडिट और श्रमिकों के लिए अनिवार्य सुरक्षा प्रशिक्षण को सख्ती से लागू करना आवश्यक होगा।




