
खरसिया। खरसिया विकास खण्ड बानीपाथर के आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित के कार्यालय में एक ऐसा दृश्य सामने आया,जिसने न केवल दिलों को झकझोर दिया,बल्कि राष्ट्रीय आदर्शों के प्रति हमारी संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े कर दिए।

वहां भारत रत्न,पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की तस्वीर पर माला चढ़ी हुई थी,जबकि ठीक बगल में लगी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की तस्वीर बिना माला के अनदेखी की स्थिति में थी।
यह दृश्य वहां आने वालों के दिलों को चुभ गया। कई लोगों ने इसे गहरी लापरवाही और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति असम्मान का प्रतीक माना। एक स्थानीय बुजुर्ग ने भावुक होकर कहा, “महात्मा गांधी, जिनके नेतृत्व और बलिदान से हमें आज़ादी मिली, उनकी तस्वीर को इस तरह उपेक्षित देखना हर भारतीय के लिए शर्मनाक है।”
इस घटना ने जनता के बीच गुस्से और निराशा को जन्म दे दिया है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यह केवल भूल नहीं हो सकती, बल्कि हमारी जिम्मेदारियों के प्रति उदासीनता है।
“महात्मा गांधी न केवल हमारे राष्ट्रपिता हैं, बल्कि वे हर भारतीय के आत्मसम्मान और प्रेरणा के प्रतीक हैं। उनकी तस्वीर का ऐसा अनादर…”
यह घटना केवल माला चढ़ाने या न चढ़ाने की बात नहीं है, यह हमारी सोच और संवेदनशीलता पर भी एक सवाल है। क्या हम वाकई अपने इतिहास और उन महान व्यक्तित्वों का सम्मान कर पा रहे हैं, जिनके संघर्षों से हमारा वर्तमान बना है?
इस घटना ने जिम्मेदारो की कार्यशैली और हमारी राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि यह वाकई एक भूल थी या फिर सम्मान की अनदेखी। लेकिन यह घटना हर किसी को यह सोचने पर मजबूर कर गई कि क्या हम अपने आदर्शों और इतिहास को सही मायनों में संजो रहे हैं।
हम अपने देश के महान विभूतियों का सम्मान करते हुए उनके आदर्शों और शिक्षाओं को अपने जीवन में आत्मसात करने का प्रयास करते हैं। उनकी तपस्या, त्याग और योगदान ने देश को एक नई दिशा दी है। उनका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणास्त्रोत है और हमें उनके दिखाए मार्ग पर चलकर देश की उन्नति में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।




