
रायगढ़। अब पंचायत सचिवों ने भी नौकरी को स्थाई करने की मांग की है। सोमवार को जिले भर के सचिवों ने पहले धरना दिया। उसके बाद रैली निकालकर पहले कलेक्टोरेट और फिर जिला पंचायत पहुंचे। सचिवों ने नौकरी का सरकारीकरण करने की मांग रखी है।
ग्राम पंचायत स्तर पर कोई भी काम हो, पंचायत सचिवों पर पूरा भार डाल दिया जाता है, लेकिन इतने सालों तक नौकरी करने के बाद भी सचिवों के लिए सरकार ने कुछ नहीं सोचा। सोमवार को जिले भर के सचिवों ने मिनी स्टेडियम में धरना दिया। इसके बाद उन्होंने रैली निकाली। पहले कलेक्टर को ज्ञापन दिया और फिर जिला पंचायत सीईओ से भी मिले। सचिव संघ का कहना है कि वे तकरीबन 29 विभागों के काम करते हैं। केंद्र और राज्य की अहम योजनाओं को जनता तक पहुंचाते हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान भी सचिवों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

नरवा, गरवा, घुरवा और बाड़ी योजना के तहत गौठान व मनरेगा के काम भी प्रमुखता से कर रहे हैं। लेकिन इतने सालों तक सेवा के बाद भी अब तक सचिवों की सेवा का शासकीयकरण नहीं किया जा रहा है। पूर्व में 65 विधायक इसकी अनुशंसा कर चुके हैं। उनका कहना है कि सचिवों को शासकीय सेवा में जोडऩे से सरकार पर 75 करोड़ का भार आएगा जो बहुत कम है। सचिवों ने मुख्यमंत्री, पंचायत मंत्री और मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा है।






