छत्तीसगढ़

गोंदिया का बिल लेकर दूसरे प्रदेशों में बेच रहे चावल, टैक्स से बचने के लिए कुछ राईस मिलर करते हैं तिकड़म

रायगढ़। रायगढ़ के कुछ राईस मिलरों का दिमाग बहुत तिकड़मी है। पता चला है कि कनकी और चावल को प्रदेश से बाहर बेचने में टैक्स की भारी चोरी की जा रही है। गोंदिया से फर्जी बिल मंगवाकर दूसरे प्रदेशों में चावल सप्लाई की जा रही है। जिले में कस्टम मिलिंग के बाद कुछ राईस मिलर दूसरी तरह से अवैध कमाई करने में जुटे हैं। चावल कूटने के बाद बचे हुए कनकी का कारोबार छिप जाता है।

सूत्रों के मुताबिक गोंदिया महाराष्ट्र से से कुछ फर्मों से फर्जी बिल मंगवा लिए जाते हैं। इसमें चावल या कनकी बेचना दिखाया जाता है। इधर काकीनाड़ा या विशाखपट्टनम तक चावल की सप्लाई की जाती है। दरअसल छग में बिल जेनरेट होने पर मंडी टैक्स समेत कई तरह के कर चुकाने पड़ते हैं।

इससे बचने के लिए राइस मिलर फर्जी बिल जेनरेट कराते हैं। इसकी सहायता से हर साल अवैध कमाई की जाती है। कई राइस मिलर तो कस्टम मिलिंग के बीच में ही अपना कारोबार चलाते रहते हैं। दो सालों से जिले में राइस मिलरों की कोई जांच ही नहीं हुई है।

नहीं दी फ्री सेल की जानकारी
पिछले साल मार्कफेड ने सभी मिलरों को फ्री सेल की जानकारी मांगी थी। सरकार जानना चाहती थी कि कस्टम मिलिंग के अलावा कौन सा मिलर कितना चावल कहां-कहां बेचता है। लेकिन इस आदेश को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। किसी मिलर ने जानकारी नहीं दी । इसमें बड़ा गोलमाल हो रहा है।

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Gopal Krishna Naik

Editor in Chief Naik News Agency Group

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