आध्यात्मखरसियाछत्तीसगढ़

बिना देखे ही श्रीकृष्ण को दिल दे बैठी थी रुक्मिणी, इस तरह हुआ दोनों का मिलन…

बाल लीला में कथा अमृत का रसपान कराते हुए आज के कथा में…

धर्मनगरी खरसिया के धन्य धरा में चपले ग्रामवासी,क्षेत्रवासियों,गेंद लाल श्रीवास परिवार की ओर से नंदेली रोड स्थित कथा स्थली में आयोजित

श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ पुराण सप्ताह के राष्ट्रीय सनातन धर्म रक्षक प्रवक्ता श्री इन्द्रेश उपाध्याय जी महाराज के कर कमलों से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र चपले हाॅस्पिटल में वाटर कूलर

गो लोकवासी श्रीमती दुखनी बाई(गेंद लाल श्रीवास की मां)के स्मृति में…

कथा आयोजक परिवार के ओर से डाक्टर अभिषेक पटेल बीएमओ सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र चपले हाॅस्पिटल परिवार को सौंपने के पश्चात

https://www.youtube.com/live/XGinlJyNV9M?feature=share

आज दोपहर 03बजे से कथा का रसास्वादन …

भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह की कहानी अनूठी है।रुक्मिणी बिना देखे ही श्रीकृष्ण को चाहने लगी थीं। जब उनका विवाह शिशुपाल से तय हुआ तो कृष्ण रुक्मिणी का हरण करके द्वारिका ले आए।

द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण और राधा के प्रेम की कहानियां तो हम अक्सर सुनते आए हैं। मगर कृष्ण और राधा का कभी विवाह नहीं हुआ था।श्रीकृष्ण का विवाह रुक्मिणी से हुआ था। रुक्मिणी ने कृष्ण को कभी नहीं देखा था, फिर वह उन्हें बहुत चाहती थीं। जब रुक्मिणी का रिश्ता चेदिराज शिशुपाल से तय हुआ तो, श्रीकृष्ण ने उनका हरण करके उनसे विवाह कर लिया था। पढ़ें श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के प्रेम की अनोखी कथा ।

कौन थीं रुक्मिणी?

रुक्मिणी विदर्भ देश के राजा भीष्मक की पुत्री थीं। वह दिखने में बहुत ही सुंदर, बुद्धिमान और स्वभाव की सरल कन्या थीं। राजा भीष्मक के दरबार में जो कोई आता, वह भगवान श्रीकृष्ण साहस और बुद्धिमता की तारीफ करता । रुक्मिणी बचपन से कई लोगों के मुख से कृष् की तारीफ सुनती आ रही थीं। इस कारण वह उन्हें चाहने लगी थीं।

शिशुपाल से तय हुआ रुक्मिणी का विवाह

राजा भीष्मक ने अपने पुत्र रुक्म के कहने पर रुक्मिणी का विवाह चेदिराज शिशुपाल से तय कर लिया था। रुक्म शिशुपाल का खास मित्र था, इसलिए वह अपनी बहन का विवाह उससे कराना चाहता था। दूसरी ओर रुक्मिणी भले श्रीकृष्ण से कभी नहीं मिली थीं, लेकिन वह उन्हें दिल से चाहती थीं। इसलिए उन्हें यह रिश्ता पसंद नहीं आया। रुक्मिणी और शिशुपाल के विवाह की तारीख तय हो गई। रुक्मिणी के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गईं।

रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण को भिजवाया संदेश

रुक्मिणी ने ठान लिया कि वह विवाह सिर्फ श्रीकृष्ण से करेंगी, नहीं तो अपने प्राण त्याग कर देंगी। उन्होंने अपनी एक सखी के माध्यम से श्रीकृष्ण को संदेश भिजवाया।

फाइल फोटो श्री बाघेश्वर धाम धीरेन्द्र शास्त्री जी कथा व्यास श्री इन्द्रेश उपाध्याय जी महाराज मिलन …

रुक्मिणी ने संदेश में कहलवाया कि वह उनसे प्रेम करती हैं औ उसका विवाह शिशुपाल से तय हो गया है। अगर उसकी शादी कृष्ण से नहीं होगी तो वह प्राण त्याग देंगी। जैसे ही कृष्ण के पास संदेश पहुंचा, वह चकित रह गए। द्वारिकाधीश ने भी रुक्मिणी की सुंदरता और बुद्धिमता के बारे में बहुत सुन रखा था।

संदेश मिलते ही श्रीकृष्ण विदर्भ पहुंच गए। जब शिशुपाल विवाह के लिए द्वार पर आया तभी कृष्ण ने रुक्मिणी का हरण कर लिया। जब रुक्मिणी के भाई रुक्म को पता चला तो वह अपने सैनिकों के साथ कृष्ण के पीछे गया। फिर श्रीकृष्ण और रुक्म के बीच भयंकर युद्ध हुअ जिसमें द्वारिकाधीश विजयी हुए।

इसके बाद श्रीकृष्ण रुक्मिणी को लेकर द्वारिका आ गए और दोनों ने विवाह कर लिया…

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Gopal Krishna Naik

Editor in Chief Naik News Agency Group

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