ठंड में अभी गलन, ठिठुरते नौनिहाल कैसे जाएं स्कूल के वार्षिक उत्सव में ?

ठंड में अभी गलन, ठिठुरते नौनिहाल कैसे जाएं स्कूल?

कलेक्टर के निर्देश का नहीं हो रहा पालन

वायरल हो रहा आमंत्रण पत्र
क्षेत्र में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। तापमान में गिरावट और गलन का दौर जारी है। इसी बीच बच्चों के शतीकालीन अवकाश खत्म हो गए

खड़ शिक्षा अधिकारी खरसिया ए के भारद्वाज ने बताया की रात में नहीं कर सकते हैं …ठण्ड बहुत है दिन में किए जाने के लिए निर्देश…

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क्षेत्र में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। तापमान में गिरावट और गलन का दौर जारी है। इसी बीच बच्चों के शतीकालीन अवकाश खत्म हो गए। सोमवार से फिर से स्कूल शुरू हो जाएंगे। लेकिन बच्चों और अभिभावकों का केवल एक ही सवाल है, इतनी ठंड में स्कूल कैसे जाएं?

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स्कूलों का समय 07 बजे, इतने समय पारा 10-12 डिग्री
निजी व सरकारी स्कूल दोनों ही सोमवार से खुलेंगे। कई स्कूलों का समय सुबह 7 या 8बजे का है। बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए एक से डेढ घंटे पहले घर से निकलना पड़ता है। सुबह 5से 6बजे ठंड का कहर अधिक है। पारा 12-13 डिग्री तक ही रहता है।

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15 डिग्री तापमान, तब शिक्षा विभाग ने की छुट्टी
शिक्षा विभाग ने स्कूलों की छुट्टी 24 दिसम्बर से कर दी थी। लेकिन, उस समय न्यूनतम पारा 15 डिग्री से अधिक था। मगर निजी स्कूलों ने इस दौरान भी स्कूल खुले रखे। निजी स्कूलों ने छुट्टी 1 जनवरी से दी थी। प्रदेश में तेज ठंड पडऩे का दौर 1 जनवरी से शुरू हुआ है। मगर विभाग ने छुट्टी 24 दिसम्बर से ही दी दी। ऐसे में सवाल यह है कि प्रदेश में तेज ठंड का दौर बदला रहा है तो बच्चों को छुट्टियां पुराने कैलेंडर के तहत क्यूं की जाएं?

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अभिभावकों ने कहा, स्कूल की छुट्टियां बढ़े या समय 10 बजे का हो
शहर में सौ अभिभावकों से बात की। 70 फीसदी से अधिक अभिभावकों ने कहा कि तेज ठंड को देखते हुए प्रशासन को स्कूलों की छुट्टियां बढ़ानी चाहिए। वहीं 33फीसदी ने कहा कि स्कूलों का समय सुबह 10 बजे का होना चाहिए। ताकि बच्चे जब घर से निकलें तो ठंड का असर थोड़ा कम हो जाए।

जिला कलेक्टर के निर्देश का नहीं हो रहा पालन
वहीं क्षेत्र के एक निजी औद्योगिक संस्थान के स्कूल में वार्षिक उत्सव मनाया जाना चर्चा में है ठिठुरते ठंड की रात में बच्चों से वार्षिक उत्सव कार्यक्रम। कई कार्यक्रम ऐसे हैं जिसमें बच्चे बहुत ही कम कपड़े में रहेंगे ठंड का कितना असर होगा आखिर अंदाजा लगा सकते हैं कलेक्टर के निर्देश के उपरांत भी शिक्षा विभाग मौन साधा हुआ है और कार्यक्रम की सारी तैयारियां दूत गति से चल रही है नौनिहालों की स्वास्थ्य पर कितना बुरा प्रभाव पड़ेगा इसका जरा भी सोच विचार उपरोक्त संस्थान नहीं कर रहा है उन्हें तो केवल ….?




