
खरसिया। रायगढ़ जिले के खरसिया तहसील अन्तर्गत भुपदेवपुर थाना के ग्राम सिंघनपुर स्थित स्टेट हाईवे-200 पर हुए सड़क हादसे में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती उमा राठिया की मौके पर ही मौत हो गई। दुनिया देखने के पूर्व हादसे में उनका गर्भस्थ शिशु भी नहीं बच सका। पति टिका राम राठिया और तीन वर्षीय बेटी घायल हो गए हैं।
मीडिया को मिली जानकारी के अनुसार, श्रीमती उमा राठिया अपने परिवार के साथ बड़ादरहा रामपुर से सिंघनपुर आ रही थीं, तभी एक कोयला लोड ट्रेलर की चपेट में आ गईं। दुर्घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश फैल गया।
घटना से नाराज ग्रामीणों ने सड़क पर चक्का जाम कर दिया, जिससे स्टेट हाईवे-200 पर यातायात बाधित हो गया। मौके पर एसडीएम प्रवीण तिवारी और एसडीओपी प्रभात पटेल, नायब तहसीलदार काजल अग्रवाल पहुंचकर परिजनों और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं।
भीषण गर्मी के बीच जारी चक्का जाम से राहगीरों को परेशानी हो रही है। भुपदेवपुर पुलिस,प्रशासन यातायात बहाल करने और स्थिति नियंत्रित करने में जुटा है।
जनप्रतिनिधित्व की जिम्मेदारी और संवेदनशील हस्तक्षेप का उदाहरण
भुपदेवपुर थाना क्षेत्र के सिंघनपुर में सड़क हादसे के बाद उत्पन्न आक्रोश और चक्काजाम की स्थिति ने प्रशासनिक तंत्र को तत्काल सक्रिय होने के लिए मजबूर किया। घंटों तक चले गतिरोध के बीच जब संवाद की प्रक्रिया ठहरती नजर आ रही थी, तब स्थानीय विधायक उमेश पटेल का मौके पर पहुंचना घटनाक्रम का निर्णायक मोड़ साबित हुआ।

विधायक ने न केवल शोकाकुल परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट की, बल्कि परिस्थितियों की गंभीरता को समझते हुए प्रशासन और ग्रामीणों के बीच एक सेतु की भूमिका निभाई। उनका हस्तक्षेप महज़ औपचारिक उपस्थिति नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि की सक्रिय भागीदारी के रूप में सामने आया—जहां संवाद,धैर्य और विश्वास तीनों को संतुलित करने का प्रयास स्पष्ट दिखा।
मानवीय दृष्टि से देखें तो यह हस्तक्षेप उस दीपक के समान प्रतीत होता है, जो अंधकारमय क्षणों में दिशा का बोध कराता है। जब जनभावनाएं उग्र होती हैं, तब नेतृत्व का असली मूल्य उसकी संवेदनशीलता और निर्णय क्षमता में निहित होता है। विधायक पटेल ने इस कसौटी पर स्वयं को संतुलित और उत्तरदायी साबित किया।

यह घटना केवल एक प्रशासनिक समाधान नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधित्व की उस मूल भावना को भी रेखांकित करती है, जिसमें जनसेवा केवल कर्तव्य नहीं,बल्कि नैतिक दायित्व बन जाती है। खरसिया के विधायक के रूप में उनकी भूमिका ने यह संकेत दिया कि संकट की घड़ी में नेतृत्व की उपस्थिति ही नहीं,बल्कि उसका प्रभावी हस्तक्षेप भी उतना ही आवश्यक होता है।

इस प्रकार की सक्रियता न केवल जनविश्वास को मजबूत करती है, बल्कि प्रशासनिक तंत्र और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय की एक सकारात्मक मिसाल भी प्रस्तुत करती है।



