
धान खरीदी केंद्रों में शुक्रवार सुबह 11 बजे सर्वर बंद होने के बाद शाम 5:30 बजे तक प्रणाली बहाल नहीं हो सकी। छह घंटे से अधिक समय तक चली इस बाधा में ठिठुरती ठंड में इंतजार कर रहीं बरगढ़ खोला के बुजुर्ग महिला किसान सबसे ज्यादा प्रभावित रहीं।

धान खरीदी व्यवस्था पूरी तरह ऑनलाइन सत्यापन और प्रविष्टि प्रणाली पर आधारित है। सर्वर बंद होते ही तौल, पर्ची और भुगतान प्रक्रिया रुक जाती है। चरम खरीदी अवधि में ऐसी तकनीकी रुकावटें किसानों की पूरी दिनचर्या और श्रम पर सीधा असर डालती हैं।
केंद्रों पर सुबह से मौजूद कई बुजुर्ग महिला किसानों को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ा। पूछताछ पर कर्मचारियों की ओर से जवाब मिला, “सर्वर डाउन है, मैं क्या कर सकता हूं… देखता हूं।”
लगातार प्रयासों के बावजूद देर शाम तक सर्वर दुरुस्त न होने से किसानों में नाराज़गी और चिंता बढ़ती गई।
लंबे समय तक सर्वर विफल रहना खरीदी तंत्र की तकनीकी तैयारी में कमजोरियों की ओर संकेत करता है। ठंड में खड़े बुजुर्ग किसानों की स्थिति यह बताती है कि सिस्टम की विश्वसनीयता कमजोर होने पर सबसे अधिक प्रभाव संवेदनशील वर्ग पर पड़ता है। यह मौजूदा खरीदी प्रबंधन की मानवीय और तकनीकी दोनों चुनौतियों को उजागर करता है।
किसानों का समय और श्रम बर्बाद हुआ, जबकि ठंड के कारण स्वास्थ्य जोखिम भी बढ़ा। लंबी कतारों और अनिश्चितता ने खरीदी प्रक्रिया की सुचारु गति पर प्रतिकूल असर डाला।
तकनीकी बैकअप, सर्वर क्षमता वृद्धि और मौके पर त्वरित समाधान के लिए प्रशिक्षित कर्मियों की व्यवस्था आवश्यक मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानवीय संवेदना को ध्यान में रखते हुए ऐसी स्थितियों में बुजुर्ग और महिलाओं के लिए विशेष इंतज़ार व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।




