अघोर पीठ जनसेवा अभेद आश्रम ट्रस्ट का 18वाँ स्थापना दिवस 12 जून को, सेवा और साधना का अनूठा संगम बनेगा आयोजन…

“गुरु कृपा से मिटे अज्ञान का अंधकार,
अघोर पथ दिखाए जीवन का सच्चा सार।
सेवा में शिव, साधना में सत्य का विस्तार,
गुरुवर के चरणों में निहित है संसार।”
अकलतरा। आध्यात्मिक चेतना, मानव सेवा और लोककल्याण के संकल्प को समर्पित अघोर पीठ जनसेवा अभेद आश्रम ट्रस्ट, पोड़ी-दल्हा अपने 18वें स्थापना दिवस का आयोजन 12 जून 2026, शुक्रवार को श्रद्धा, सेवा और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाने जा रहा है। इस अवसर पर आश्रम परिसर में दिनभर विभिन्न धार्मिक, सामाजिक एवं जनसेवा आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, माताओं और धर्मबंधुओं की सहभागिता अपेक्षित है।

स्थापना दिवस केवल किसी संस्था की वर्षगांठ नहीं होता, बल्कि उसके द्वारा समाज में किए गए सतत योगदान, सेवा भावना और आध्यात्मिक मूल्यों के पुनर्स्मरण का अवसर भी होता है। अघोर पीठ जनसेवा अभेद आश्रम ट्रस्ट ने विगत अठारह वर्षों में आध्यात्मिक साधना के साथ-साथ मानव सेवा को अपनी कार्यसंस्कृति का अभिन्न अंग बनाया है। यही कारण है कि यह संस्था क्षेत्र में श्रद्धा और विश्वास का एक सशक्त केंद्र बनकर उभरी है।
आयोजन की शुरुआत प्रातःकालीन स्वच्छता अभियान से होगी, जिसके पश्चात सुबह 8 बजे आरती एवं पूजन संपन्न कराया जाएगा। इसके बाद ध्वज पूजन, सफल योनि पाठ तथा अखंड संकीर्तन के माध्यम से वातावरण को भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर किया जाएगा। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण जनसेवा से जुड़े कार्य होंगे, जिनके अंतर्गत अस्पताल में भर्ती मरीजों एवं उनके परिजनों के बीच दूध, ब्रेड और फलों का वितरण किया जाएगा।
अघोर परंपरा का मूल दर्शन सेवा, समता और करुणा पर आधारित है। यही दर्शन इस स्थापना दिवस के कार्यक्रमों में भी स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ जरूरतमंदों की सेवा को समान महत्व देना संस्था की उस विचारधारा को दर्शाता है, जिसमें ईश्वर की उपासना और मानवता की सेवा को एक-दूसरे का पूरक माना गया है।
सामाजिक एवं आध्यात्मिक क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि ऐसे आयोजन समाज में केवल धार्मिक चेतना ही नहीं जगाते, बल्कि सेवा, सहयोग और संवेदनशीलता जैसे मानवीय मूल्यों को भी मजबूत करते हैं। वर्तमान समय में जब सामाजिक संबंधों और मानवीय सरोकारों के सामने नई चुनौतियां हैं, तब इस प्रकार के आयोजन समाज को सकारात्मक दिशा देने का कार्य करते हैं।

श्रद्धालुओं, माताओं एवं धर्मबंधुओं से स्थापना दिवस समारोह में सपरिवार शामिल होकर कार्यक्रम को सफल बनाने तथा सेवा एवं साधना की इस पुण्य परंपरा का सहभागी बनने का आग्रह किया है। 18 वर्षों की इस यात्रा के बाद आश्रम का यह स्थापना दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि समाज और मानवता के प्रति समर्पण के संकल्प का पुनर्पुष्टि पर्व भी होगा।



