भक्ति के सुरों में सराबोर हुआ बसना, चौथे दिवस की कथा में साध्वी राधा किशोरी ने सुनाया प्रेम और समर्पण का संदेश

बसना। मंडी प्रांगण बसना जिला महासमुंद में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के चौथे दिवस का आयोजन भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना के अद्भुत वातावरण के बीच सम्पन्न हुआ।

कथा पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भगवान की लीलाओं के श्रवण में भाव-विभोर दिखाई दिए। श्रीधाम अयोध्या से पधारी पूज्य साध्वी राधा किशोरी जी ने व्यासपीठ से श्रीकृष्ण भक्ति, प्रेम और आत्मसमर्पण के प्रसंगों का मार्मिक वर्णन करते हुए श्रोताओं को धर्म और जीवन मूल्यों का संदेश दिया।
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कथा के दौरान साध्वी राधा किशोरी जी ने कहा कि जीवन की सबसे बड़ी विजय अहंकार को त्यागकर प्रेम को अपनाने में है। उन्होंने भावपूर्ण शब्दों में बताया कि जब मनुष्य ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण कर देता है, तब उसके जीवन के संघर्ष भी साधना का स्वरूप धारण कर लेते हैं। कथा के बीच-बीच में भजन, संकीर्तन और जयघोष से पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा।
उन्होंने एक भावपूर्ण संदर्भ प्रस्तुत करते हुए कहा कि “जब खेल अपनों से हो तो हारने में भी आनंद आता है”, ठीक उसी प्रकार भगवान और भक्त का संबंध प्रतिस्पर्धा का नहीं, बल्कि प्रेम और समर्पण का होता है। भक्त जब अपने आराध्य के सामने स्वयं को समर्पित कर देता है, तब उसकी हार भी आध्यात्मिक विजय में परिवर्तित हो जाती है। यह भाव उपस्थित श्रद्धालुओं के हृदय को गहराई से स्पर्श करता दिखाई दिया।
कथा के चौथे दिवस में भगवान की विभिन्न लीलाओं और धर्म के शाश्वत सिद्धांतों का विस्तार से वर्णन किया गया। साध्वी जी ने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को दिशा देने वाला आध्यात्मिक दर्शन है, जो व्यक्ति को कर्तव्य, करुणा, संयम और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन की आध्यात्मिक गरिमा को और बढ़ाया। महिलाओं, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों ने पूरे मनोयोग से कथा श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया।

श्रीमद्भागवत कथा का यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं,बल्कि समाज में संस्कार, सद्भाव और आध्यात्मिक जागृति का माध्यम बनकर उभर रहा है। चौथे दिवस की कथा ने यह संदेश दिया कि जीवन में प्रेम, विनम्रता और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास ही वास्तविक सुख और शांति का आधार हैं।

आगामी दिनों में कथा के अन्य महत्वपूर्ण प्रसंगों के साथ श्रद्धालुओं को श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का श्रवण करने का अवसर प्राप्त होगा, जिसकी प्रतीक्षा बसना क्षेत्र के भक्त समुदाय उत्साहपूर्वक कर रहा है।



