यादों के झरोखे से – एक भावभीनी श्रद्धांजलि

खरसिया।आज ग्राम जैमुरा का मिडिल स्कूल एक विशेष भावनात्मक क्षण का साक्षी बना। सन् 1962 विद्यालय के प्रथम प्रधानपाठक स्व. श्री देशराज मलिक जी की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शिक्षा, सेवा और स्मृति का अद्भुत संगम देखने को मिला।
स्व.श्री देशराज मलिक जी उन चंद गुरुजनों में से थे जिनके कर्म और व्यक्तित्व ने एक पूरे क्षेत्र की पीढ़ियों को दिशा दी। उनके कार्यकाल ने न केवल विद्यालय की बुनियाद को मजबूत किया,बल्कि शिक्षा को गांव की पहचान बनाया।
इस पावन स्मृति दिवस पर,ग्राम के वयोवृद्ध एवं सेवानिवृत्त शिक्षक युगेश द्विवेदी ने बच्चों को केला, मीठा, मिक्सचर और प्याजी बड़ा परोसकर स्नेह और संस्कार का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। जैसे-जैसे बच्चों के हाथों में मिठास पहुँची,वैसे-वैसे हर किसी की आंखों में स्व. देशराज जी की स्मृतियां ताज़ा हो उठीं।
इस भावभीने अवसर पर गाँव के अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे:
- हिमांचल सिदार, सरपंच प्रतिनिधि
- देवकुमार महंत, उपसरपंच प्रतिनिधि
- सूरज राम नायक, प्रधानपाठक, मिडिल स्कूल जैमुरा
- सेवकराम पटेल, प्रधानपाठक, प्राथमिक शाला जैमुरा
- बन्धुराम पटेल, अध्यक्ष, शाला विकास समिति
मिडिल स्कूल एवं प्राथमिक शाला का समस्त शिक्षकगण भी इस श्रद्धांजलि सभा में अपनी उपस्थिति से भावनाओं को साझा करते रहे।
कार्यक्रम की सबसे मार्मिक घड़ी तब आई जब नीरज मलिक, स्व. देशराज मलिक जी के सुपुत्र, ने अपने पिता के पहले कार्यस्थल को उनकी स्मृति में ₹25,000 की राशि भेंट की। यह दान न केवल आर्थिक सहायता है, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा की वह विरासत है, जो अब नई पीढ़ी को संवारने का कार्य करेगी।
विद्यालय परिवार ने नीरज मलिक का आभार व्यक्त करते हुए आश्वस्त किया कि इस राशि का उपयोग छात्रों की शैक्षणिक उन्नति हेतु पूरी निष्ठा से किया जाएगा।
आज का दिन केवल एक पुण्यतिथि नहीं था, यह एक संवेदना, सम्मान और संस्कार का सजीव चित्र था – जिसमें अतीत की छाया में वर्तमान का दीप जलाया गया।
स्व.श्री देशराज मलिक जी को समस्त जैमुरा ग्रामवासी,शिक्षकगण एवं छात्रगण की ओर से भावपूर्ण श्रद्धांजलि।
“गुरु वही जो समय के साथ मिट नहीं जाता, बल्कि पीढ़ियों में बस जाता है।”




