
खरसिया।छत्तीसगढ़ सरकार जहां एक ओर भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त रुख अपनाने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर खरसिया जनपद पंचायत में सामने आए एक बड़े भ्रष्टाचार के मामले को लेकर जिला प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि जनपद पंचायत खरसिया के तकनीकी सहायक धनवान सिंह अदिले पर गंभीर आर्थिक अनियमितताओं के आरोप लगने के बावजूद उसके खिलाफ कोई ठोस कार्यवाही न कर उसे धरमजयगढ़ संलग्नीकरण कर दिया गया, जिससे यह संदेह गहराता जा रहा है कि क्या भ्रष्टाचारियों को बचाया जा रहा है?
गंभीर आरोप: सरकारी योजनाओं की राशि का दुरुपयोग

प्राप्त जानकारी के अनुसार, धनवान सिंह अदिले पर आरोप है कि उन्होंने सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं — जिनमें मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) जैसे कार्यक्रम शामिल हैं — की राशि का अपने माता-पिता, भाई और अन्य रिश्तेदारों के नाम पर दुरुपयोग किया। आरोप है कि फर्जी मस्टर रोल और बिलिंग के माध्यम से लाखों रुपये की हेराफेरी की गई।

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मामले में कलेक्टर को शिकायत कर जांच की मांग की थी। वहीं, शासन के उच्च अधिकारियों को भी मामले से अवगत कराया गया।
सरकार के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता पर कड़ी कार्यवाही की जाए, परंतु खरसिया जनपद पंचायत में इस मामले में केवल संलग्नीकरण कर देने से यह संदेश जा रहा है कि प्रशासन भ्रष्टाचार को दबाने की कोशिश कर रहा है।
संलग्नीकरण या संरक्षण?
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम सवाल यह उठता है कि आखिरकार इतनी बड़ी वित्तीय अनियमितता के बाद भी धनवान सिंह अदिले पर कार्यवाही क्यों नहीं किया गया? क्या केवल स्थानांतरण या संलग्नीकरण भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने का एक तरीका है?
धरमजयगढ़ में संलग्नीकरण को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं — क्या यह ‘सजा’ है या ‘पुरस्कार’? लोगों का कहना है कि जब दोषी व्यक्ति के खिलाफ जांच लंबित है या भ्रष्टाचार सिद्ध हो चुका है, तब ऐसे व्यक्ति को प्रशासनिक सुविधा देना प्रशासन की मंशा पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
खरसिया क्षेत्र में आक्रोश
खरसिया क्षेत्र में इस प्रकरण को लेकर काफी चर्चा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की यह कार्यप्रणाली भ्रष्टाचारियों को हौसला दे रही है और इससे साफ प्रतीत होता है कि ऐसे मामलों में ऊपरी दबाव या संरक्षण प्राप्त है। जनमानस यह भी जानना चाहता है कि किस अधिकारी या जनप्रतिनिधि के “संकेत पर” यह संलग्नीकरण किया गया?
प्रशासन और सरकार को चाहिए कि इस प्रकरण में निष्पक्ष जांच कराते हुए दोषियों पर कड़ी कार्यवाही सुनिश्चित करे। केवल स्थानांतरण या संलग्नीकरण से न तो भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और न ही जनता का भरोसा कायम रहेगा। यदि इस तरह के मामलों में कठोर कदम नहीं उठाए गए तो यह सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम को कमजोर कर देगा।
यदि आपके पास इस प्रकरण से संबंधित दस्तावेज़, प्रमाण या अन्य तथ्य हों, तो कृपया साझा करें। हम इस समाचार को आगे विस्तारित करेंगे और जनता की आवाज़ को प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।



