राजेश शर्मा @खरसिया।धर्म नगरी खरसिया की पावन धरा पर पितृमोक्षार्थ सात दिवशीय संगीतमय श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह का आयोजन गर्ग परिवार (नवापारा वाले) के द्वारा दिनांक 28 अगस्त से 3 सितम्बर तक स्थानीय कन्या विवाह भवन में करवाया जा रहा है।
कथा व्यास अतुल कृष्ण भारद्वाज ने श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दौरान चतुर्थ दिन ज्ञान की महिमा के बारे में श्रद्धालु जनों को बताया कि मनुष्य को गृहस्थ जीवन जीने के लिए भगवान शिव के आदर्शों पर चलना चाहिए। भगवान शिव अपने विवाह के श्रृंगार से समाज को बताना चाहते हैं मेरे सिर पर नाग विराजमान है जिसका तात्पर्य है कि संसार के समस्त प्राणियों के सिर पर कॉल रूपी नाग बैठा है जो प्रत्येक दिन उसकी आयु को खा रहा है। भगवान शेर की खाल धारण कर यह बताना चाह रहे हैं कि मनुष्य को गृहस्थ जीवन संयमित जीवन सिंह की तरह जीना चाहिए क्योंकि शेर अपने जीवन में एक नारीव्रत धारी है। लोगों ने कहा है कि विवाह में दूल्हा घोड़े पर बैठता है परंतु भगवान शिव नंदी पर बैठे हैं जिसका तात्पर्य यह है कि नंदी धर्म का प्रतीक है और घोड़ा काम का प्रतीक है भगवान शिव पूरे शरीर पर चिता की राख लपेटे हैं जिसका तात्पर्य यह कि दुनिया के सभी प्राणियों को एक दिन चिता में ही जाना है।
पूज्य व्यास जी ने भगवान श्री राम एवं भगवान श्री कृष्ण के जन्म उत्सव का सुंदर वर्णन करते हुए कहा कि जब जब धरती पर अधर्म का बोलबाला होता है तब तब भगवान किसी न किसी रूप में धरती पर अवतरित होकर असुरों का नाश करते हैं, जिससे अधर्म पर धर्म की विजय होती है। पूज्य व्यास ने कहां की भगवान कण-कण में विराजमान है सर्वत्र विद्यमान हैं प्रेम से पुकारने पर कहीं भी प्रगट हो सकते हैं भगवान तो निर्मल मन एवं भक्ति देखते हैं इसलिए कहा गया है कि हरि व्यापक सर्वत्र समाना प्रेम से प्रकट होही मैं जाना।
भगवान श्री कृष्ण के जन्म का हजारों श्रोताओं ने लिया आनंद
भागवत कथा के चौथे दिन कृष्ण जन्मोत्सव का समाचार सुनकर भवन में उपस्थित हजारों श्रोता झूम उठे। भवन का दृश्य ऐसा दिख पड़ रहा था, जैसे साक्षात भगवान प्रकट हुए हैं।




