आध्यात्म

मानव की इच्छाओं की पूर्ति न होना ही दुख का मूल कारण, संयमित जीवन ही सच्चा सुख – परम पूज्य कापालिक

अघोर पीठ जनसेवा अभेद्य आश्रम में अनन्य दिवस पर सेवा,साधना और समर्पण का विराट संगम

लैलूंगा।अघोर पीठ जनसेवा अभेद आश्रम ट्रस्ट पोड़ीदल्हा, अकलतरा की शाखा अघोर पीठ जनसेवा अभेद आश्रम, पाकरगांव में शनिवार को अनन्य दिवस का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, सेवा और आध्यात्मिक वातावरण में भव्य रूप से सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु, ग्रामीणजन और सेवा लाभार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। पूरा आश्रम परिसर वैदिक मंत्रोच्चार, अघोर नाम जप-संकीर्तन और लोककल्याण की भावना से ओतप्रोत नजर आया।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातःकाल हवन-पूजन, वैदिक मंत्रोच्चार और अघोर संकीर्तन के साथ किया गया। साधना, सेवा और समर्पण के इस त्रिवेणी संगम ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। श्रद्धालुओं ने अनुशासित रूप से अनुष्ठानों में भाग लिया और सेवा कार्यों में सहयोग किया।

निःशुल्क चिकित्सा शिविर में लगभग 2000 मरीजों को लाभ

अनन्य दिवस के अवसर पर आश्रम द्वारा विशाल निःशुल्क एलोपैथिक एवं आयुर्वेदिक चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। इसमें एजी अस्पताल एंड रिसर्च सेंटर, पत्थलगांव (जिला जशपुर) सहित विभिन्न विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने अपनी सेवाएं दीं।

एलोपैथिक चिकित्सा शिविर में—

  • सर्दी, खांसी और बुखार के 800 मरीज,
  • सिकल सेल के 75 मरीज,
  • हड्डी रोग के 186 मरीज,
  • महिला रोग से संबंधित 210 मरीज
    का उपचार किया गया।

नेत्र परीक्षण शिविर में 86 मरीजों की जांच की गई, जिनमें 4 मरीज मोतियाबिंद से पीड़ित पाए गए। इन सभी का निःशुल्क ऑपरेशन एजी अस्पताल, पत्थलगांव में आश्रम की ओर से कराया जाएगा। वहीं 38 मरीजों को चश्मा योग्य पाया गया।

हाइड्रोसील रोग के 15 मरीजों की जांच में 5 मरीज ऑपरेशन योग्य पाए गए, जिनका ऑपरेशन लैलूंगा में किया जाएगा।

फिजियोथेरेपी सेवा के अंतर्गत कमर दर्द, घुटना दर्द, जोड़ दर्द, कंधा दर्द और लकवा से पीड़ित 45 मरीजों को विशेष उपचार प्रदान किया गया।

आयुर्वेदिक चिकित्सा से सैकड़ों मरीजों को राहत

आयुर्वेद विभाग के चिकित्सकों द्वारा—

  • वातारोग के 221,
  • उदर रोग के 90,
  • चर्म रोग के 50,
  • कास-खांसी के 78,
  • पाइल्स के 20,
  • स्त्री रोग के 55
    मरीजों का निःशुल्क उपचार कर औषधियों का वितरण किया गया।

यह शिविर ग्रामीण अंचल के लिए बड़ी राहत साबित हुआ, जहां सामान्य स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच सीमित रहती है।

4990 कंबल और 6000 लोगों के लिए भंडारा

सेवा कार्यों की कड़ी में आश्रम द्वारा ठंड से बचाव हेतु जरूरतमंदों को 4990 कंबलों का निःशुल्क वितरण किया गया।
साथ ही अनन्य दिवस के अवसर पर लगभग 6000 लोगों के लिए विशाल भंडारे की व्यवस्था की गई, जिसमें श्रद्धालुओं, ग्रामीणों और सेवा लाभार्थियों ने सहभागिता की।

संयमित जीवन पर दिया आध्यात्मिक संदेश

कार्यक्रम के समापन अवसर पर परम पूज्य कापालिक धर्मरक्षित रामजी बाबा  ने अपने आशीर्वचन में कहा—

“मानव की इच्छाओं की पूर्ति न होना ही दुख का मूल कारण है। संयमित जीवन ही सच्चा सुख, शांति और परमार्थ की ओर ले जाता है। बाहरी आडंबरों से हटकर आत्मा के भीतर प्रकाश और वास्तविकता को खोजने की आवश्यकता है। मानव सेवा ही सबसे बड़ी सेवा है।”

बाबा जी के इन विचारों ने उपस्थित जनसमूह को आत्मचिंतन, संयम और सेवा भाव की दिशा में प्रेरित किया।

अनन्य दिवस का आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें सामाजिक उत्तरदायित्व, स्वास्थ्य सेवा और मानवीय संवेदना का स्पष्ट समन्वय देखने को मिला। ग्रामीण क्षेत्रों में निःशुल्क चिकित्सा, कंबल वितरण और सामूहिक भोजन जैसे कार्यों ने आश्रम की जनसेवा प्रतिबद्धता को मजबूती से रेखांकित किया।

आश्रम प्रबंधन के अनुसार आने वाले समय में स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सेवा के और भी व्यापक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि ग्रामीण और वंचित वर्गों तक सतत सहायता पहुंचाई जा सके।

अनन्य दिवस ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब साधना के साथ सेवा जुड़ती है, तो उसका प्रभाव समाज के हर स्तर तक पहुंचता है।

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Gopal Krishna Naik

Editor in Chief Naik News Agency Group

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