
जय प्रकाश डनसेना@ खरसिया/शक्ति। श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिन गुरुवार को कथा वाचिका प्रभादेवी ने सुदामा चरित्र एवं सुखदेव विदाई के मार्मिक प्रसंगों का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। कथा स्थल पर उपस्थित जनसमुदाय ने कृष्ण-सुदामा की मित्रता की अमर गाथा को बड़े ध्यान से सुना और उससे जीवन में कठिनाइयों का सामना करने की प्रेरणा प्राप्त की।

प्रभादेवी ने अपने प्रवचन में कहा कि मित्रता में न तो अमीरी-गरीबी देखी जाती है, न ही किसी प्रकार का स्वार्थ। सुदामा ने जीवनभर अभावों में रहते हुए भी अपनी मित्रता को सर्वोपरि रखा। उन्होंने निस्वार्थ भाव से श्रीकृष्ण के प्रति अपनी भक्ति दिखाई और कुछ भी मांगने से इंकार किया। इस पर भगवान श्रीकृष्ण ने भावुक होकर उन्हें अपने सिंहासन पर स्थान दिया और उनके समर्पण को प्रणाम किया।
कथा वाचिका ने कहा कि सुदामा चरित्र हमें यह सिखाता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी संयम, श्रद्धा और मित्रता के आदर्शों को नहीं छोड़ना चाहिए। सुदामा ने कष्टों को सहा लेकिन अपने आत्मसम्मान और मित्रता की गरिमा को बनाए रखा। प्रभादेवी ने कहा, “सच्चा मित्र वही होता है जो अपने मित्र को सही राह दिखाए, उसकी गलतियों को रोके और हर परिस्थिति में साथ दे।”

इस अवसर पर परीक्षित मोक्ष व भगवान सुखदेव की विदाई का भी मार्मिक वर्णन किया गया। कथा के दौरान भजनों की प्रस्तुति पर श्रद्धालु झूम उठे और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
कथा कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष टिकेश्वर गबेल, बीडीसी अनिता परमानंद सिदार सहित बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे। प्रभादेवी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि भागवत कथा का श्रवण करने से आत्मा को शांति और परम सुख की प्राप्ति होती है। इसमें निहित उपदेश और जीवन मूल्य मानव जीवन को सफल बनाने में सहायक हैं।
कथा समापन के साथ ही श्रद्धालुओं ने भगवान के चरणों में प्रणाम करते हुए यह संकल्प लिया कि वे श्रीमद् भागवत कथा में बताए गए आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएंगे और सच्ची भक्ति व मित्रता की राह पर अग्रसर होंगे।



