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सफल राजनीति के कुशल चितेरे शहीद नंदकुमार पटेल

आज शहादत दिवस पर विशेष …

सफल राजनीति के कुशल चितेरे

शहीद नंदकुमार पटेल – विरोधी भी जिनकी करते थे प्रसंशा

ग्राम पंचायत स्तर पर लोगों के साथ मिलकर संगठन के माध्यम से समस्याओं के निदान करने और एक दक्ष राजनैतिक व्यक्तित्व की पहचान बनने के बाद निर्विरोध सरपंच के रूप में अपनी राजनीतिक सफर की शुरुआत करने वाले नंदकुमार पटेल एक ऐसे राजनीतिज्ञ बने जो आज के दौर में एक आदर्श की तरह है । ना केवल अपने पार्टी के लोग बल्कि विरोधी भी उनके व्यक्तित्व और कार्यशैली के प्रशंसकों में शामिल होते थे और वे भी राजनीतिक प्रतिद्वंदिता को चुनाव तक सीमित रखकर अपने पूरे कार्यकाल में किसी भी कार्य को संपादित करने में दलगत राजनीति से ऊपर उठ कर सबके काम को निष्पक्ष भाव से संपादित करने में अपनी भूमिका निभाते थे । शहीद नंदकुमार पटेल के निष्ठा और राजनीतिक दक्षता की परख करते हुए 1990 के विधानसभा चुनाव में उन्हें खरसिया विधानसभा का प्रत्याशी बनाया गया और किसान पुत्र नंदकुमार पटेल ने गांव,गरीब, किसान मितान का भरोसा जीत कर तब के धुरंधर राजनीतिज्ञ भारतीय जनता पार्टी के पितृ पुरुष स्वर्गीय लखीराम अग्रवाल को परास्त कर एक  कीर्तिमान स्थापित कर दिया। इसके पश्चात फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और खरसिया विधानसभा क्षेत्र के अजेय योद्धा बनकर जीवन पर्यंत नंदकुमार पटेल जन जन के लाडले दुलारे नेता बन गए ।
25 मई 2013 को एक कायराना नक्सली हमले में हमने नंदकुमार पटेल और उनके बड़े पुत्र दिनेश पटेल सहित कांग्रेस के दिग्गज नेताओं पुलिस के जवानों सुरक्षाकर्मियों को मिलाकर 30 लोगों को खो दिया आज उनकी शहादत दिवस पर हम पुण्य स्मरण करते हुए उन्हें अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं

आम आदमी के खास नेता के रूप में छत्तीसगढ़ प्रदेश में अपनी विशेष पहचान बनाने वाले सफल राजनीतिज्ञ छत्तीसगढ़ एवं मध्यप्रदेश में गृह मंत्री का दायित्व कुशलता पूर्वक निर्वहन करने वाले रायगढ़ जिला के नंदेेेली ग्राम में पिता स्वर्गीय महेंद्र सिंह पटेल एवं माता इंदुमती पटेेल के द्वितीय पुत्र रत्न के रूप में जन्मे नंदकुमार पटेल उस शख्सियत का नाम है जो छत्तीसगढ़ की जनता के आशा और विश्वास के केंद्र बने हुए थे राजनीतिक कर्मभूमि में ग्राम पंचायत के सरपंच के रूप में अपनी सफर की शुरुआत करने वाले कर्मयोगी शहीद पटेल ने अपनी कर्मठता, उत्कृष्ट कार्यशैली एवं दूरदर्शी राजनीतिक सोच से उस मुकाम को हासिल की जो उन्हें एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में सर्वमान्य व्यक्ति बना गया था। अपने राजनीतिक यात्रा में नंदकुमार पटेल ने सरपंच से लेकर जनपद सदस्य और विधायक से लेकर गृहमंत्री तक के गुरूत्तर दायित्व को बेहद ही कुशलता के साथ न केवल निर्वहन किया वरन राजनीति में स्व अनुशासन एवं व्यवहार नीति का समन्वय कितना आवश्यक होता है इसे प्रमाणित करके भी दिखाया था। विधानसभा चुनाव में 5 मार्च 1990 को मध्यप्रदेश के नवम् विधानसभा का पहली
बार सदस्य बनने के बाद नवंबर 1993 फिर 1995 एवं 1998 के विधानसभा चुनाव में लगातार अधिक मतों के अंतर से जीत का झंडा फहराया और नया राज्य बनने के बाद दिसंबर 2003 और वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में भी बढ़ते मतों के अंतराल से सतत विजयश्री का वरण कर एक कीर्तिमान स्थापित करने वाले नंदकुमार पटेल खरसिया विधानसभा क्षेत्र के अजेय योद्धा बने रहे । शहीद पटेल दिग्विजय सिंह मंत्रिमंडल में राज्य मंत्री गृह तथा जल संसाधन इत्यादि विभागों में अपनी नेतृत्व क्षमता की बदौलत मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ में गृह मंत्रालय की कमान संभालने वाले एक सफल राजनीतिज्ञ के रूप में अपने आप को प्रतिष्ठित किया था । विधानसभा के विभिन्न समितियों के सदस्य एवं सभापति बनकर आपने इन पदों को सुशोभित किया । आपने खरसिया विधानसभा क्षेत्र को शिक्षा सड़क और पेयजल के क्षेत्र में एक आदर्श स्वरूप बनाया जिसके लिए खरसिया विधानसभा को रोल मॉडल के रूप में देखा जाता रहा है ।
पार्टी प्रदेश अध्यक्ष के रूप में नंदकुमार पटेल के तीखे तेवर, आक्रामक रवैया अथक परिश्रम अनवरत कार्यक्रम एवं कार्यकर्ताओं तक पहुंचने की अनोखी कार्यशैली ने छत्तीसगढ़ प्रदेश के कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में जैसे प्राणवायु संचारित करने का काम किया I छत्तीसगढ़ के प्रमुख नगरों में अंबिकापुर बिलासपुर राजधानी रायपुर में दिग्गज नेताओं को जोड़कर एक तरफ पार्टी के बीच एकता का बीज बोया तो दूसरी तरफ उन्होने कार्यकर्ताओं को पार्टी के प्रति समर्पण एवं अनुशासन का पाठ भी पढ़ाया । शहीद नंदकुमार पटेल ने अपने पार्टी के वर्षों से लंबित कार्यकारिणी को नए स्वरूप में स्थापित कर सभी शीर्षस्थ नेताओं को एक मंच पर जोड़ा वहीं दूसरी ओर कार्यकर्ताओं के स्वाभिमान को जागृत करने में भी सफलता पाई।
जिन कार्यों ने शहीद पटेल  को एक अलग व्यक्तित्व के रूप में नई छवि स्थापित करने वाले नेतृत्व की पहचान दी उनमें हम इन कार्यों को याद करते हैं –
∆ अंबिकापुर के नक्सल प्रभावित बलरामपुर जिला अंतर्गत सांगोद थाना के ग्राम करचा में कथित नक्सली मुठभेड़ में पुलिसिया अनाचार की शिकार युवती मीना खलखो के गांव पहुंचकर पीड़ित महिला के परिजनों से मिले और उन्हें पार्टी की तरफ से आर्थिक सहायता दिला कर निष्पक्ष जांच की मांग की
∆ छत्तीसगढ़ में खरीफ फसल के दौरान सहकारी समितियों में खाद की कृत्रिम कमी एवं कालाबाजारी के लिए जिलों में जाकर कांग्रेस पदाधिकारियों को साथ लेकर जिला कलेक्टरों से भेंट की बरसात के दिनों में प्रदेश के कई जिलों में अनवरत बारिश के कारण बाढ़ की भयावह स्थिति से तबाह हुए लोगों के बीच शहीद पटेल  ने स्वत: पहुंचकर उनके दुख दर्द में शामिल होकर अपने पार्टी कार्यकर्ताओं को हरसंभव सेवा एवं सहायता के लिए प्रेरित किया।
∆ पार्टी के केंद्रीय प्रतिनिधि एवं मंत्रियों द्वारा को साथ लेकर प्रदेश अध्यक्ष के रूप में शहीद पटेल ने शिवरीनारायण, चंद्रपुर, रायगढ़ जिला के सरिया, पुसौर के बाढ़ प्रभावितों से मिलकर उन्हें सहायता पहुंचाई ।
प्रदेश में किसी भी पीड़ित ,शोषित, उपेक्षित एवं हादसों के शिकार लोगों से मिलने वालों में पहले व्यक्ति शहीद नंदकुमार पटेल हुआ करते थे।
प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उपरोक्त कार्यो ने उन्हें पार्टी के आलाकमान का करीबी एवं विश्वासपात्र नेता बना दिया । छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन का शंखनाद करते हुए उन्होंने अंबिकापुर से बस्तर और रायगढ़ से दुर्ग तक उत्तर से दक्षिण पूरब से पश्चिम हर क्षेत्र में पहुंच कर कार्यकर्ताओं में उत्साह और ऊर्जा का संचार किया । 
   परंतु काल की गति और प्रकृति की क्रूर नियति को जन भावना के साथ चलना शायद स्वीकार नहीं था और 25 मई 2013 के उस दिन को हमें पुण्य तिथि के रूप में अंकित करने को विवश कर दिया। परिवर्तन यात्रा के दौरान जब वे बस्तर क्षेत्र में एक सभा के पश्चात जगदलपुर के लिए अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ आगे बढ़ रहे थे तभी  दरभा के झीरम घाटी में नक्सलियों के कायराना हमला में अपने जेष्ठ पुत्र दिनेश पटेल के साथ वे शहादत को प्राप्त हो गए। क्रूर और दुर्भाग्यपूर्ण नक्सली हमले ने हमारे प्रिय लाडले छत्तीसगढ़ के गांव गरीब किसानों के आशा व विश्वास के केन्द्र जन जन के हितैषी शहीद नंदकुमार पटेल को उनके प्रिय पुत्र के साथ ही छत्तीसगढ़ प्रदेश के दिग्गज कांग्रेसी नेताओं पुलिस के जवानों, सुरक्षा कर्मियों को मिलाकर 30 लोगों के जान ले लिए और अब हम अपने यादों में ही शहीद नंदकुमार पटेल और उनके प्रिय जेष्ठ पुत्र भैया दिनेश को चिरस्मरणीय बनाकर रखने को विवश हो गए। उम्मीदों का वह चिराग असमय ही बुझ कर हमारे सामने एक गहन
अंधकार को छोड़ गया ।
∆  विश्वविद्यालय की स्थापना प्रदेश सरकार की सार्थक पहल ..
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शहीद पटेल के यादों को चिरस्मरणीय बनाने की दिशा में पहल करते हुए रायगढ़ व जांजगीर चांपा के महाविद्यालयों को जोड़ कर रायगढ़ मे वर्ष 2020 में शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है यह विश्वविद्यालय अभी अपनी शैशवावस्था में है। इस विश्वविद्यालय को अपने श्रम साधना से सींच कर पुष्पित पल्लवित एवं एक विशाल वटवृक्ष के रूप में प्रतिष्ठित करने की जिम्मेदारी हम सब की बनी हुई है । विशेषकर उनके सुपुत्र एवं राजनीतिक विरासत के संवाहक के रूप में  सुयोग्य पिता के सुयोग्य उत्तराधिकारी, युवाओं के बीच लोकप्रिय तथा पिता के पदचिन्हों पर चल रहे उमेश पटेल जब उच्च शिक्षा के साथ युवाओं के सभी विभागों के मंत्रालय को संभाल रहे है तब इस विश्वविद्यालय की सुख्याति को प्रतिष्ठित करना उनकी जिम्मेदारी बन गई है विश्वविद्यालय के लिए जमीन उपलब्ध कराने से लेकर भवन व अधोसरंचना विकास के कार्यों को गति देने की आवश्यकता है ।
कुलपति पटैरिया निभा रहे अपनी भूमिका ..
विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति प्रोफ़ेसर डॉ.ललित प्रकाश पटैरिया शहीद नंदकुमार पटेल के सपनों को साकार करने की दिशा में विश्वविद्यालय के विभिन्न कार्यक्रमों को कुशलता पूर्वक संचालित करने में समर्पित हैं ।शहीद नंद कुमार पटेल की स्मृति ग्रंथ प्रकाशन के साथ विश्वविद्यालय प्राइवेट सूची में प्रथम स्थान प्राप्त करने वालों के लिए 2 दर्जन से अधिक गोल्ड मेडल की व्यवस्था दानदाताओं के माध्यम से इनके द्वारा किया जा चुका है वही विश्वविद्यालय नए विकल्पों की स्थापना और शोध छात्रों के लिए नए अवसर स्थापित करने जैसे कार्यक्रमों को गति दिया जा रहा है ।
उम्मीद है यह विश्वविद्यालय शहीद नंदकुमार पटेल के अधूरे सपनों को साकार करने के साथ साथ रायगढ़ के सथ छत्तीसगढ़ के नाम को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में सफल होगी और यह एक पवित्र श्रध्दाजंलि के साथ सच्चा पुण्य स्मरण भी होगा शहीद नंदकुमार पटेल के पुनीत कर्मों को …


भोजराम पटेल
(लेखक शहीद नंदकुमार पटेल  के निज सहायक रहे  हैं।)

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Gopal Krishna Naik

Editor in Chief Naik News Agency Group

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