खरसिया

मानवता का यह कर्म, देता है आपको उत्तम स्वास्थ्य और ग्रह-दोषों से मुक्ति-पं.कान्हा शास्त्री

विश्व रक्तदान दिवस : रक्तदान कर क्या आप भी महसूस करना चाहेंगे कुछ ऐसा..

मानवता का यह कर्म, देता है आपको उत्तम स्वास्थ्य और ग्रह-दोषों से मुक्ति

@ पं.कान्हा शास्त्री

रक्तदान को महादान कहा गया है, मानवता की स्थापना और उसके भविष्य के लिए रक्तदान का महत्व हमेशा से ही अतुलनीय माना गया है। रक्त की कमी शरीर को विभिन्न प्रकार के रोगों की चपेट में ले जाती है। मानवता एवं स्वास्थ्य की दृष्टिकोण से तो रक्तदान एक महादान है ही वहीं ज्योतिष की नजर से भी रक्तदान बहुत फायदेमंद या लाभकारी सिद्ध हो सकता है। ज्योतिष के अनुसार रक्तदान करना आपके बहुत से ग्रह दोषों को शांत करता है।

रक्त से रिश्ता जोड़ बनिये दूसरे की सांसो की डोर

समय पर खून न मिल पाने से भारत में हर साल करीब पंद्रह लाख मरीजों को जान से हाथ धोना पड़ता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक अध्ययन के मुताबिक भारत में सालाना एक करोड़ यूनिट रक्त की जरूरत पड़ती है। लेकिन हमारे यहां स्वैच्छिक रक्तदान से केवल पचास प्रतिशत खून ही जमा हो पाता है। आधुनिक तकनीकी से लैस ब्लड बैंकों की कमी के चलते रक्त के अवयवों का इस्तेमाल भी सीमित है और रक्त की कमी का फायदा पेशवर तरीके से खून बेचने वाले उठाते हैं।

रक्त के अभाव में दम तोड़ते जरूरतमंद को बचाने के लिये स्वैछिक रक्तदान को एक आंदोलन का स्वरूप देने की जरूरत है। कुछ भ्रांतियां जो लोगों के दिमाग में घर कर गई हैं, उन्हें दूर करने की आवश्यकता है।

जरा सोचिये किसी अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष के बाहर मरीज के परिजनों की पथराई आंखों से झरते आंसुओं और बच्चों की टुकुर-टुकुर निहारती कातर निगाहों के कारण बने मुर्दा निर्वात को तोड़ती हुई आपके रक्तदान करने आवाज कैसे उम्मीद का तार झंकृत कर देती है। कुछ लम्हा पहले तक जहां निराशा के तवील अंधेरे जिंदगी को निगल जाने को आमादा था वहीं अब इंसानियत की इक नजर ने तमाम अंधेरों को निगल लिया। कहने का तात्पर्य है रक्तदान के बाद होने वाला अहसास आत्मा से परमात्मा के साक्षात्कार की अनुभूति देता है। लेकिन विडंबना है कि ऐसे पुनीत अनुभव और उत्तरदायित्व की राह जन सहभागिताके अभाव में सूनी पड़ी है।

छत्तीसगढ़ रक्तदाता ग्रुप के रक्त वीर – प्रमोद कुमार पटेल, डॉ.सतीश दीवान, विनोद शर्मा, करन शर्मा, ललित सिन्हा, लोकेश भिलाई, रायपुर, देवर्षि चौधरी बायंग, श्यामा चरण डनसेना, देवा डनसेना, अभिषेक विधानी, रवि श्रीवास रायगढ़ और अगणित मित्र प्रमुख रूप से मेरे साथ रक्तदान के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं जिनका मै सदैव आभारी रहूंगा ।

श्लोकार्धेन प्रवक्ष्यामि यदुक्तं ग्रन्थकोटिभिः।
परोपकारः पुण्याय पापाय परपीडनम् ॥

जो करोडो ग्रंथों में कहा है, वह मैं आधे श्लोक में कहता हूँ; परोपकार पुण्यकारक है, और दूसरे को पीडा देना पापकारक है ।

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Gopal Krishna Naik

Editor in Chief Naik News Agency Group

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