माँरायगढ़

बच्चों को दूसरों के भरोसे छोड़ संक्रमण रोकने में जुटी माताएँ

मदर्स डे विशेष : समाज के लिए कलेजे के टुकड़ों से महीने दूर, पर बढ़ता गया प्यार

मई महीने के दूसरे रविवार को मदर्स डे यानी मातृत्व दिवस मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य मां की निःस्वार्थ सेवा और प्यार के बदले उन्हें सम्मान और धन्यवाद देने के लिए लोगों को जागरूक करना है। हालांकि, कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर के चलते इस साल भी मदर्स डे के जश्न पर व्यापक असर पड़ने वाला है क्योंकि महामारी की दूसरी लहर के चलते लॉकडाउन जो है।
मदर्स डे पर हम उन कोरोना वॉरियर्स मां और उनके बच्चों के मन की बात लेकर आए हैं कि कैसे कोरोना जैसी आपदा में समाज की माताएं अपना सबकुछ दांव पर लगाकर मानव जीवन की सेवा में लगी हैं। ऐसे में वह केवल अपने बच्चों की मां न होकर एक व्यापक दायरा समेट लेती हैं।


डॉ. कल्याणी पटेल और उनकी बेटी अनूभूति
डॉ. कल्याणी पटेल : 5 साल की बेटी को दुलारने को हो रहा इंतजार
महामारी रोग विशेषज्ञ डॉ. कल्याणी पटेल बीते डेढ़ साल से कोरोना संक्रमण की रोकथाम में महती भूमिका निभा रही हैं| उनकी योजनाओं ने जिले को कई विपरीत परिस्थितियों से बचाया। डॉ. कल्याणी के पति डॉ. योगेश पटेल कोविड के जिला नोडल अधिकारी हैं| इनकी 5 साल की बच्ची अनूभूति पटेल है। डॉ. कल्याणी बीते एक साल से ढंग से अपनी बच्ची से नहीं मिल पाई है, बेटी को दुलार करने के लिए वह कोरोना संक्रमण के खत्म होने का इंतजार कर रही हैं। दिसंबर महीने में वह कोरोना संक्रमित हुई और उसके एक महीने बाद जनवरी महीने में उनके पति डॉ. योगेश पटेल। पांच साल की अनूभूति ने गजब का


अपने बच्चों के साथ श्रीमती तिवारी
शिवकुमारी तिवारी : संयुक्त परिवार की दमदार कोरोना वॉरियर
बीते 04 दशक से नगर निगम में कार्यरत राजस्व उपनिरीक्षक शिवकुमारी तिवारी उन महिलाओं में से एक हैं जो इस पूरे कोरोना संक्रमण काल में ऑफिस-फील्ड में आती-जाती रहीं और अपना दायित्व बखूबी निभाती रहीं। बेटी अन्नपूर्णा (25) और बेटे आदित्य (30) को उनकी फिक्र लगी रहती है। बकौल अन्नपूर्णा: “मां हमारी ऊर्जास्त्रोत हैं जब से कोविड आया है तब से हम में मां को लेकर एक अनजाना सा डर बना रहता है कि उन्हें कहीं कुछ हो न जाए,किसी कोरोना संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में न आ जाए। उन्हें सुरक्षा के सारे जतन के साथ ही बाहर भेजते हैं, वह कोविड वैक्सीनेटेड हैं फिर भी सतर्क हैं। उन्हें भान है कि हम संयुक्त परिवार में रहते हैं, दफ्तर से आने के बाद वह ही घर का पूरा ख्याल रखती हैं। वह कोरोना वॉरियर तो हैं ही एक उम्दा


परिवार के साथ जया मजूमदार
जया मजूमदार : कोरोना ने बच्चों को समझदार बना दिया
7 मई को बेटी का जन्मदिन था उसने मुझे 7 बजे आने को कहा था लेकिन मैं देर से आई तो कहा कि रोज देर से आती हो आज जल्दी बुलाया था अब मेरा जन्मदिन अगले साल मनाना। यह बाते बताईं जया मजूमदार ने जो मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में सहायक ग्रेड 3 में कार्यरत हैं और प्रचार-प्रसार का कार्य देखती हैं। वह कोरोना से संक्रमित हो चुकी हैं अभी भी लगातार कार्य कर रही हैं। इनके बच्चों में गरिमा (11), ऐश्वर्या (8) और श्लोक (4) है।
जया बताती हैं: “ महामारी के इस समय कार्य में देर हो जाती है क्योंकि सीएमएचओ ऑफिस में कार्य है तो हमें अपने परिजनों को संक्रमण से बचाना है। संक्रमित होने का भय हमेशा लगा रहता है इसलिए घर के पीछे के रास्ते का इस्तेमाल करती हूं लेकिन मेरा बेटा दौड़कर मेरे पास आने की हमेशा कोशिश करता है और मेरी दोनों बेटियां उसे पकड़ लेती हैं और नहाने-सैनेटाइज करने के बाद ही पास जाने की बात करती हैं। मेरे संक्रमित होने पर बड़ी बेटी ने दोनों भाई-बहनों का अच्छे से ख्याल रखा। इनकी बड़ी बेटी कहती है हम मां को खूब चाहते हैं और वो बड़ा काम कर ही हैं कोरोना को भगा रही हैं वो हमसे पहले कई लोगों की मम्मी है।‘’गृहणी भी हैं हमें उन पर नाज़ है।“
उनके 30 वर्षीय बेटे आदित्य तिवारी कहते हैं कि मां के कार्यक्षेत्र वाले वार्ड नंबर 02 में अभी कोरोना संक्रमण अत्यधिक फैला हुआ है तो उन्हें जरूरी कार्य पड़ने पर ही बाहर जाने दे रहे हैं फिर भी प्रशासनिक बैठकों के लिए दफ्तर जाना ही होता है। वास्तव में इस महामारी में हमारी माताओं ने सभी का ख्याल रखा है।
जज्बा दिखाया और मां-पिता के संक्रमित होने पर उनके पास जाने की जिद नहीं की। जब कभी मां काम से लौटकर पास आती तो सबसे पहले सैनेटाइजर ही आगे बढ़ाती।
नन्ही अनुभूति कहती है: “कब कोरोना खत्म होगा, कब लॉकडाउन खत्म होगा मुझे मम्मी-पापा के साथ खेलना है, अभी मम्मी के पास बहुत काम है और वह खूब देरी से घर आती हैं खूब काम करती है।“
डॉ. कल्याणी बताती हैं कि महामारी के समय वह बेटी के साथ वक्त नहीं बिता पा रही है जिसका उनको दुख है। एक घर में रहकर बेटी से नहीं मिल पाना ऐसा कभी नहीं सोचा था। लेकिन वह इस समय ज्यादा समझदार हो गई है।


अपने बच्चों के साथ डॉ. जया
डॉ. जया साहू : मां की जरूरत घर से ज्यादा समाज को
मेडिकल कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. जया साहू हाल में कोविड अस्पताल से तीसरी बार ड्यूटी से लौटी हैं। 14 दिन घर परिवार से बिल्कुल दूर फिर 7 दिन का हताश करने वाला क्वारंटाइन मन को बोझिल कर देता है क्योंकि घर में बेटा संस्कार और बेटी संस्कृति जो है। शुरुआत में तो बच्चे भी डर गए थे क्योंकि मां और पापा (स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. टीके साहू) अक्सर अस्पताल में ही रहते। इसी दौराना बेटे का संक्रमित होना, मां की कोविड ड्यूटी और पिता का शासकीय कार्य से बाहर रहना बच्चों में खौफ पैदा कर गया। ऐसी विषम परिस्थिति में डॉ. जया ने हिम्मत नहीं हारी, बच्चों को समझाती और यह डर निकालती। बेटी तो अब भी सोते समय मास्क पहनती है। बेटा बड़ा है इसलिए अब समझदार हो गया है वो कहता है कि मां-पिता की जरूरत घर से ज्यादा लोगों को है।
डॉ. जया कहती हैं: “दोनों बच्चे मुझसे बहुत करीब हैं, शुरुआत में बहुत दुख हुआ पर इस कोरोना ड्यूटी ने एक नया अनुभव दिया है। ड्यूटी के दौरान मन में अजीब सी दहशत होती है पर उसके बाद अजीब सा सुकून, इसे शब्दों में बयां करना कठिन है।“

बेटी के साथ नर्स सुनैना
नर्स सुनैना : सकारात्मकता से जीतती हर पड़ाव
मेडिकल कॉलेज की स्टाफ नर्स सुनैना विशाल मसीह कोविड हॉस्टिपल में पेशेंट केयर रेड जोन से ड्यूटी करके लौटेने के बाद संक्रमित हो गई हैं। उनसे पति भी संक्रमित हुए हैं दोनों होम आइसोलेशन में हैं। उनकी 04 साल की बेटी आव्या उनसे दूर परिजनों के पास है, बेटी अपनी मां से हर बार कहती है कि लॉकडाउन में सबकी मम्मी तो घर में रहती हैं आप क्यों बाहर जाती हैं| बाहर कोरोना है मत जाइये। डॉक्टर्स संभाल लेंगे आप मत जाओ।
छोटे बच्चों को छोड़कर जाना मुश्किल होता है| शुरू में आव्या के मन में कोरोना फेयरी टेल वाला दानव था पर अब उसे हमने समझा दिया है पर मिस तो करते हैं। मैं पेंटिंग भी करती हूं जिससे उसको समझाने में मदद मिली।

श्रीमती कमलारामरतन पटेल

मैंने अस्पताल में देखा है संक्रमित मरीज पूछते हैं कि क्या वे बच जाएंगे, उनके मन में भय है कि कोरोना हुआ तो मर जाएंगे पर ऐसा नहीं है लोग भ्रम न पालें। हम उनको लगातार समझाते हैं कि आप स्वस्थ हो जाएगें। लोग सुरक्षित रहें, स्वस्थ रहें।

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Gopal Krishna Naik

Editor in Chief Naik News Agency Group

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