धान उपार्जन केंद्रों में पक्का चबूतरा निर्माण झोल-झाल करने वालें का गिद्ध नजर

धान उपार्जन केंद्रों में पक्का चबूतरा निर्माण झोल झाल करने वालें का गिद्ध नजर

समर्थन मूल्य में खरीदे गए धान को पानी तथा चूहों के द्वारा नुकसान से बचाने के लिए राज्य शासन के निर्देशानुसार धान उपार्जन केंद्रों में पक्का चबूतरे का निर्माण किया जा रहा है।

रायगढ़ जिले के खरसिया विकास खण्ड में पक्का चबूतरे का निर्माण हजार लाखों करोड़ रुपये की लागत से धान उपार्जन केंद्रों में किया गया है। उपार्जन केंद्र में पक्का चबूतरा बन जाने से धान रखने में सुविधा होगी तथा बारिश के पानी से जल भराव होने से धान को भीगने से बचाया जा सकता है।

सरपंच सचिव द्वारा निर्माण किए जाने की जानकारी आप सभी को होगा परंतु हैरान कर देने वाली वाक्य ग्राम पंचायत मुरा के सचिव से मिली जानकारी के अनुसार चबूतरे का स्वीकृति जिला पंचायत के जिम्मेदार द्वारा कराया गया है इस लिए चबूतरे का निर्माण उनके द्वारा कराया जा रहा है निर्माण नरेगा मद के रुपये की लागत से चबूतरे का निर्माण नहीं किया जा है। आखिर कौन है ओ जिम्मेदार …?

हमारा टीम किसी व्यक्ति या समाज पर आरोप प्रत्यारोप नहीं लगा रहा…

उपरोक्त बातों को ग्राम पंचायत मुरा के सचिव ने टेलीफोनीक जानकारी में दिया गया। आखिर मनरेगा के कार्य कैसे चल रहा है जनपद पंचायत खरसिया के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आर डी साहु के जिम्मेदार अधिकारी के कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया? इतना ही नहीं मनरेगा के जिम्मेदारो के जिम्मेदारी मे बड़ी झोल झाल पर कार्यवाही किए जाने की शिकायत पर आर ई एस एसडीओ शिकायत करने वालें को ही उल्लू जुलुल बाते कर उलझा निष्पक्ष जांच पड़ताल पर पानी फेर देते है।जिसकी विडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है …
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ऐसा ही एक दूसरा मामला ग्राम पंचायत रानीसागर मे अखिल भारतीय अघरिया समाज इकाई खरसिया के सामाजिक गतिविधियों को सुव्यवस्थित करने के लिए भवन निर्माण किए जाने वर्षों पूर्व मुख्यमंत्री राशि स्वीकृत तों कर दिए परन्तु लापरवाहो के लापरवाही के वजह से सामाजिक गतिविधियों के लिए भवन के निर्माण अधर पर लटका हुआ …

जांच पड़ताल होने पर दुध का दुध और पानी का पानी होगा….
बिलासपुर और मुरा धान उपार्जन के निर्माणाधीन चबूतरा के गुणवत्ता ???




