सरकार ने किसानों के लिए पर्याप्त उर्वरक भंडार की पुष्टि की…
वर्तमान में 53.08 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 21.80 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 7.98 लाख मीट्रिक टन एमओपी और 48.38 लाख मीट्रिक टन एनपीकेएस का भंडार है
दिल्ली।केंद्र सरकार ने आश्वासन दिया है कि चालू रबी 2025-26 मौसम में और उसके बाद भी किसानों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त उर्वरक भंडार उपलब्ध हैं। आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में, रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने जानकारी दी कि दिनांक 23 मार्च 2026 तक, देश में 53.08 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 21.80 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 7.98 लाख मीट्रिक टन एमओपी और 48.38 लाख मीट्रिक टन एनपीकेएस का भंडार है, जो कृषि आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करता है।
तदनुसार, देश में चल रहे रबी 2025-26 मौसम के दौरान उर्वरकों (यूरिया, डीएपी, एमओपी और एनपीकेएस) की आवश्यकता, उपलब्धता, बिक्री एवं उपलब्ध स्टॉक से संबंधित जानकारी निम्नलिखित है:
भारत में रबी 2025-26 के लिए उर्वरक की स्थिति (23/03/26 तक)
एलएमटी में मात्रा
क्रम सं.
उत्पाद
01/10/25 से 23/03/26 तक आनुपातिक आवश्यकता
01/10/25 से 23/03/26 तक उपलब्धता
01/10/25 से 23/03/26 तक बिक्री
23/03/26 तक भंडार
1
यूरिया
192.20
250.26
197.21
53.08
2
डीएपी
52.80
74.74
52.94
21.80
3
एमओपी
15.23
19.07
11.10
7.98
4
एनपीकेएस
80.57
114.96
66.61
48.38
भारत अपनी मांग को पूरा करने के लिए यूरिया एवं फॉस्फेटिक उर्वरकों के आयात पर निर्भर करता है। इस निर्भरता के मद्देनजर एक स्थिर एवं सुनिश्चित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए, उर्वरक विभाग ने भारतीय कंपनियों जैसे कि कृभको, आईपीएल और सीआईएल तथा सऊदी अरब की मेसर्स मादेन के बीच दीर्घकालिक समझौतों (एलटीए) पर हस्ताक्षर करने की सुविधा प्रदान की है, जिसके अंतर्गत 2025-26 से 2029-30 तक पांच वर्षों की अवधि में भारत को प्रतिवर्ष 31 लाख मीट्रिक टन डीएपी/एनपीके की आपूर्ति की जाएगी।
इसके अलावा, वर्ष 2022-23 से 2025-26 (फरवरी 2026 तक) के लिए उर्वरकों (यूरिया, डीएपी, एमओपी एवं एनपीके) के देशवार आयात का विवरण अनुलग्नक में दिया गया है।
यूरिया के संबंध में, सरकार ने 02 जनवरी, 2013 को नई निवेश नीति (एनआईपी) 2012 की घोषणा की थी और 07 अक्टूबर, 2014 को इसमें संशोधन किया था ताकि यूरिया क्षेत्र में नए निवेश को बढ़ावा मिल सके और देश को यूरिया क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया जा सके। एनआईपी-2012 के अंतर्गत कुल 6 नई यूरिया इकाइयां स्थापित की गई हैं जिनमें नामित सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की संयुक्त उद्यम कंपनियों (जेवीसी) के माध्यम से स्थापित 4 यूरिया इकाइयां और निजी कंपनियों द्वारा स्थापित 2 यूरिया इकाइयां शामिल हैं। इन इकाइयों को जेवीसी के माध्यम से स्थापित किया गया है जिनमें तेलंगाना में रामागुंडम फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (आरएफसीएल) की रामागुंडम यूरिया इकाई और हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) की उत्तर प्रदेश, झारखंड और बिहार में क्रमशः गोरखपुर, सिंदरी और बरौनी नामक 3 यूरिया इकाइयां शामिल हैं। निजी कंपनियों द्वारा स्थापित इकाइयों में पश्चिम बंगाल में मैटिक फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (मैटिक्स) की पानागढ़ यूरिया इकाई और राजस्थान में चंबल फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (सीएफसीएल) की गडेपन-III यूरिया इकाई शामिल हैं। इनमें से प्रत्येक इकाई की स्थापित क्षमता 12.7 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष (एलएमटीपीए) है। ये इकाइयाँ नवीनतम तकनीक पर आधारित हैं और अत्यधिक ऊर्जा कुशल हैं। इस प्रकार इन इकाइयों ने यूरिया उत्पादन क्षमता में 76.2 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष की वृद्धि की है, जिससे कुल स्वदेशी यूरिया उत्पादन क्षमता (पुनर्मूल्यांकित क्षमता, आरएसी) 2014-15 में 207.54 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष से बढ़कर 2023-24 में 283.74 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष हो गई है। इसके अलावा, नामित सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, अर्थात् तालचर फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (टीएफएल) के संयुक्त उद्यम के माध्यम से एफसीआईएल की तालचर इकाई के पुनरुद्धार के लिए एक विशेष नीति को भी मंजूरी प्रदान की गई है, जिसके अंतर्गत कोयला गैसीकरण मार्ग पर 12.7 एलएमटीपीए की क्षमता वाला एक नया ग्रीनफील्ड यूरिया संयंत्र स्थापित किया जाएगा। हाल ही में, केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल ने असम के नामरूप स्थित ब्रह्मपुत्र घाटी उर्वरक निगम लिमिटेड (बीवीएफसीएल) के मौजूदा परिसर में 12.7 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) वार्षिक यूरिया उत्पादन क्षमता वाले एक नए ब्राउनफील्ड अमोनिया-यूरिया कॉम्प्लेक्स की स्थापना के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की है, जिसका नाम असम वैली फर्टिलाइजर एंड केमिकल कंपनी लिमिटेड (एवीएफसीसीएल) रखा गया है।
इसके अलावा, सरकार ने 25 मई, 2015 को मौजूदा गैस-आधारित 25 यूरिया इकाइयों के लिए नई यूरिया नीति (एनयूपी) 2015 अधिसूचित की, जिसका एक उद्देश्य आरएसी से परे स्वदेशी यूरिया उत्पादन को अधिकतम करना है। एनयूपी-2015 के कारण 2014-15 की तुलना में यूरिया के वार्षिक उत्पादन में 20-25 एलएमटी अतिरिक्त उत्पादन हुआ है।
उपरोक्त उपायों के परिणामस्वरूप यूरिया का उत्पादन 2014-15 में 225 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष से बढ़कर 2023-24 में रिकॉर्ड 314.07 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया। 2024-25 में देश में 306.67 लाख मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन हुआ।
इसके अलावा, सरकार ने दिनांक 01.04.2010 से फॉस्फेट और पोटैशियम (पी एवं के) उर्वरकों के लिए पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना लागू की है। इस योजना के अंतर्गत, पी एवं के उर्वरकों को ओपन जनरल लाइसेंस (ओजीएल) के अंतर्गत रखा गया है और कंपनियां अपने व्यवसाय की आवश्यकताओं के अनुसार इन उर्वरकों का आयात/निर्माण करने के लिए स्वतंत्र हैं।
फॉस्फेटिक उर्वरकों के आयात पर निर्भरता कम करने और देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार द्वारा निम्नलिखित उपाय किए गए हैं:
उर्वरक विभाग ने दिनांक 18.01.2024 को एमआरपी की तार्किकता सुनिश्चित करने एवं घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए दिशानिर्देश जारी किया।
अनुरोधों के आधार पर, नई विनिर्माण इकाइयों या मौजूदा इकाइयों की विनिर्माण क्षमता में वृद्धि को एनबीएस योजना के अंतर्गत मान्यता प्रदान की गई है/ रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है।
एनबीएस नीति के अंतर्गत आने वाले पी एवं के उर्वरकों की संख्या 2021 में 22 ग्रेड से बढ़कर 2021 में 28 ग्रेड हो गई है।
मिट्टी को फॉस्फेटिक या ‘पी’ पोषक तत्व प्रदान करने के लिए एसएसपी के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए खरीफ 2022 से स्वदेशी रूप से निर्मित उर्वरक एसएसपी पर माल ढुलाई सब्सिडी को मंजूरी प्रदान की गई है।
मंत्री ने इस बात पर बल दिया कि सब्सिडी के माध्यम से किसानों को लागत वृद्धि से सुरक्षित रखा जाता है। यूरिया की आपूर्ति वैधानिक रूप से अधिसूचित अधिकतम खुदरा मूल्य 242 रुपये प्रति 45 किलोग्राम बैग पर जारी है, जबकि एनबीएस योजना के अंतर्गत विशेष प्रावधान डीएपी और अन्य पी एवं के उर्वरकों की किफायत सुनिश्चित करते हैं। इसमें रसद, जीएसटी और उचित रिटर्न को कवर करने के लिए प्रति मीट्रिक टन अतिरिक्त 3,500 रुपये शामिल है, जिसे खरीफ 2025 और रबी 2025-26 के दौरान आयातित और घरेलू डीएपी एवं आयातित टीएसपी दोनों पर लागू किया गया है।


