
खरसिया।खरसिया विधानसभा क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को लेकर विधायक उमेश पटेल ने एक बार फिर विकासोन्मुख पहल करते हुए वर्ष 2026-27 की विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना अंतर्गत विभिन्न ग्रामों के लिए 47 लाख 50 हजार रुपये के विकास प्रस्ताव जिला योजना एवं सांख्यिकी विभाग को प्रेषित किए हैं।

प्रस्तावित कार्यों में मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में बोर खनन एवं पंप स्थापना जैसे अत्यंत आवश्यक कार्य शामिल हैं, जिनका सीधा संबंध आमजन की दैनिक जरूरतों और पेयजल व्यवस्था से जुड़ा हुआ है। प्रस्तावों में खरसिया एवं पुसौर विकासखंड के दर्जनों गांवों और ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया है।

विधानसभा क्षेत्र के खरसिया,पुसौर,कोतरा ,रायगढ़ ब्लॉक के ग्रामीण क्षेत्रों में बोर खनन एवं पंप स्थापना के प्रस्ताव भेजे गए हैं। अधिकांश कार्यों के लिए एक-एक लाख रुपये तथा कुछ विशेष स्थानों के लिए 50 हजार रुपये की राशि प्रस्तावित की गई है।
यह पहल केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं दिखाई देती, बल्कि ग्रामीण जीवन की मूलभूत चुनौतियों को समझने वाली संवेदनशील राजनीतिक दृष्टि का संकेत भी देती है। खरसिया अंचल लंबे समय से गर्मी के मौसम में जल संकट और पेयजल असुविधा जैसी समस्याओं से जूझता रहा है।

ऐसे समय में गांव-गांव तक पेयजल सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में प्रस्ताव भेजना स्थानीय जरूरतों के प्रति गंभीरता को दर्शाता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधायक उमेश पटेल लगातार क्षेत्रीय विकास, आधारभूत संरचना और ग्रामीण आवश्यकताओं को प्राथमिकता देते रहे हैं। उनके कार्यों में योजनाओं की औपचारिक घोषणा से अधिक जमीनी जरूरतों को शामिल करने का प्रयास दिखाई देता है। विशेष बात यह भी है कि प्रस्तावों में छोटे मोहल्लों, स्कूल परिसरों, तालाब किनारे और सामाजिक स्थलों को भी शामिल किया गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर व्यापक लाभ मिलने की संभावना है।
ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था केवल सुविधा का विषय नहीं बल्कि सामाजिक स्थिरता, स्वास्थ्य और कृषि गतिविधियों से भी जुड़ा हुआ मुद्दा है। ऐसे में इन प्रस्तावों की स्वीकृति और समयबद्ध क्रियान्वयन आने वाले समय में हजारों ग्रामीणों के लिए राहत का माध्यम बन सकता है।

विकास योजनाओं की राजनीति अक्सर बड़े घोषणापत्रों में सिमट जाती है, लेकिन खरसिया क्षेत्र में भेजे गए ये प्रस्ताव यह संकेत देते हैं कि स्थानीय आवश्यकताओं पर केंद्रित छोटे लेकिन प्रभावी कार्य ही ग्रामीण जीवन की वास्तविक तस्वीर बदलने की क्षमता रखते हैं।




