
टेमटेमा में संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा: धर्म, कर्तव्य और आत्मचिंतन का समन्वित संदेश
खरसिया। ग्राम टेमटेमा में 24 फरवरी से 2 मार्च तक आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत महापुराण एवं हरिवंश पुराण कथा के दौरान धर्म, कर्तव्य और भक्ति के समन्वित स्वर प्रमुखता से उभरकर सामने आए। कथा वाचन कर रही साध्वी राधा किशोरी ने विभिन्न पुराण प्रसंगों को वर्तमान जीवन संदर्भों से जोड़ते हुए श्रद्धालुओं से आत्मचिंतन और सत्कर्म अपनाने का आह्वान किया।

आज के कथा में समुद्र मंथन, वामन अवतार, श्रीराम कथा तथा श्रीकृष्ण प्राकट्य उत्सव जैसे प्रसंगों का क्रमबद्ध वर्णन किया गया जाएगा। वक्ता ने स्पष्ट किया कि ये आख्यान केवल धार्मिक घटनाएँ नहीं,बल्कि मानवीय संघर्ष,धैर्य, मर्यादा और धर्मनिष्ठा के स्थायी प्रतीक हैं। समुद्र मंथन को जीवन के द्वंद्व और धैर्य की परीक्षा से जोड़ा गया,जबकि वामन अवतार को अहंकार त्याग और मर्यादा के आदर्श के रूप में प्रस्तुत किया गया जाएगा।

श्रीमद्भागवत कथा के उदाहरणों के माध्यम से निष्काम कर्म,आत्मसंयम और धर्मपालन की अवधारणा को रेखांकित किया गया। श्रीराम कथा को आदर्श आचरण और कर्तव्यनिष्ठ जीवन का प्रतिरूप बताया गया,वहीं श्रीकृष्ण की लीलाओं को धर्म की स्थापना और भक्ति मार्ग की सशक्त अभिव्यक्ति के रूप में व्याख्यायित किया गया।
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संगीतमय प्रस्तुति,भजन और कीर्तन ने आयोजन को सामूहिक आध्यात्मिक अनुभव का रूप दिया। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण के साथ सामूहिक भक्ति में भागीदारी की, जिससे वातावरण अनुशासित और भक्तिमय बना रहा।
आयोजकों के अनुसार,कथा का उद्देश्य शास्त्रीय संदेशों को व्यवहारिक जीवन से जोड़ना है,ताकि समाज में नैतिक मूल्यों और सदाचार की पुनर्स्थापना हो सके। स्थानीय स्तर पर बढ़ती सहभागिता को देखते हुए आगामी दिनों में अन्य आध्यात्मिक प्रसंगों के विस्तृत विवेचन की योजना है।
धार्मिक आयोजनों के माध्यम से ग्रामीण समाज में सामूहिक संवाद और नैतिक चेतना के पुन:संस्कार की यह पहल सामाजिक समरसता और मूल्य-आधारित जीवन दृष्टि को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


