खरसिया/रायगढ़। डंकुनी से सूरत के बीच प्रस्तावित पूर्व-पश्चिम समर्पित माल दुलाई गलियारा यानी EWDFC परियोजना को लेकर रायगढ़ जिले में प्रशासनिक प्रक्रिया तेज हो गई है। कलेक्टर भू-अर्जन, रायगढ़ द्वारा जारी आदेश के अनुसार परियोजना से प्रभावित ग्रामों में प्रस्तावित अर्जित भूमि का क्रय-विक्रय, दान, अंतरण, बटांकन, व्यपवर्तन और बंटवारा तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
यह आदेश मेसर्स डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, भारत सरकार के उपक्रम रेल मंत्रालय के पत्र के आधार पर जारी किया गया है। पत्र में बताया गया है कि केंद्रीय बजट-2026 में डंकुनी और सूरत के बीच नए समर्पित माल दुलाई गलियारे की घोषणा की गई है। रेल मंत्रालय ने DFCCIL को इस परियोजना को शीघ्र लागू करने के निर्देश दिए हैं।
रायगढ़ जिले में यह कॉरिडोर रायगढ़ और खरसिया तहसील के कई गांवों से होकर प्रस्तावित है। रायगढ़ तहसील के कुशवाबहरी, उर्दना, आमापाल, लामीदरहा, गढ़कुरी, गोवर्धनपुर, कोतरलिया, पतरापाली और कोटमार गांव प्रभावित होंगे। वहीं खरसिया तहसील के तिऊर, तुरेकेला, परसकोल, औरदा, ठूसेकेला, मदनपुर, भेलवांडीह, बानीपाथर, रजघट्टा, छोटे डूमरपाली, बड़े डूमरपाली, गिंडोला, नहरपाली, सिंघनपुर, बिलासपुर और भूपदेवपुर को प्रभावित ग्रामों में शामिल किया गया है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित गांवों में भूमि से जुड़े किसी भी प्रकार के लेन-देन या राजस्व परिवर्तन पर रोक रहेगी। इसका उद्देश्य प्रस्तावित भू-अर्जन प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाए रखना है, ताकि परियोजना क्षेत्र में भूमि की स्थिति में अनावश्यक बदलाव न हो और भविष्य में मुआवजा निर्धारण या अधिग्रहण प्रक्रिया में विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।
आदेश में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व रायगढ़ और खरसिया को निर्देशित किया गया है कि वे DFCCIL रायपुर से समन्वय स्थापित करें और परियोजना से प्रभावित ग्रामों की भूमि संबंधी आवश्यक जानकारी प्राप्त कर जिला पंजीयक रायगढ़ तथा उप पंजीयक खरसिया को उपलब्ध कराएं। इसके आधार पर पंजीयन और राजस्व स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
पूर्व-पश्चिम समर्पित माल दुलाई गलियारा माल परिवहन की दृष्टि से महत्वपूर्ण परियोजना मानी जा रही है। इसके जरिए औद्योगिक और खनिज क्षेत्रों से माल ढुलाई की क्षमता बढ़ने की संभावना है। हालांकि, परियोजना के प्रभाव क्षेत्र में आने वाले गांवों के लिए भूमि अर्जन, मुआवजा, पुनर्वास और स्थानीय आजीविका जैसे मुद्दे आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण रहेंगे।



