मां आदिशक्ति की उपासक,स्नेह और संस्कार की प्रतीक: श्रीमती कमला (नीलम) नायक का जीवन-विराम…

खरसिया।किरारी जिला सक्ती से रायगढ़ जिला के खरसिया विकास खण्ड के ग्राम रक्सापाली तक के सफ़र में किरारी करमचंद नानदाई के आंगन में 10 मई 1977 को जन्मी श्रीमती कमला (नीलम) नायक अपने भाई-बहनों में सबसे छोटी थीं। बाल्यकाल से ही उनका स्वभाव सरल, संयमी और स्नेहपूर्ण रहा। परिवार में उन्हें पिता के असमय चले जाने से बडे़ भाई किरती पटेल द्वारा पिता जैसे दुलार और संरक्षण के साथ संस्कारों की मजबूत नींव मिली,जिसने आगे चलकर उनके जीवन को दिशा दी।
30मई1996 विवाहोपरांत ग्राम रक्सापाली निवासी छबिलाल नायक के बड़े सुपुत्र रोहिणी कुमार नायक के साथ उनका गृहस्थ जीवन प्रारंभ हुआ। वे परिवार की बड़ी बहु बनीं और शीघ्र ही अपने व्यवहार,कर्तव्यनिष्ठा और अपनत्व से पूरे घर की धुरी बन गईं। उनके आगमन से घर-आंगन में सुव्यवस्था, सौहार्द और पारिवारिक संतुलन स्थापित हुआ।
एक सुपुत्री प्रियंका नायक के रूप में मातृत्व का सुख उन्हें प्राप्त हुआ। पुत्री के साथ उनका संबंध केवल माँ-बेटी का नहीं, बल्कि सखी और मार्गदर्शक का भी था। बिटिया -देवर बेटा की शिक्षा, संस्कार और भविष्य को लेकर वे सदैव सजग रहीं। जब पुत्री प्रियंका के विवाह का समय आया, तो अंकित पटेल के साथ विदाई के वे क्षण उनके लिए भावनात्मक रूप से अत्यंत कठिन रहे—मानो वर्षों का स्नेह एक पल में आँचल से फिसल गया हो।
जीवन की इस कठिन घड़ी के कुछ ही समय बाद परिवार पर दुःखों का और भी गहरा साया पड़ा।
परिवार के लिए यह गहरा संकट का समय है। कैंसर जैसी असाध्य पीड़ा से जूझती श्रीमती कमला (नीलम )भाभी माँ ने वर्षों तक अदम्य साहस के साथ जीवन संघर्ष किया। समय के साथ स्वास्थ्य लगातार क्षीण होता चला गया और अंततः यह कठिन लड़ाई विराम पर पहुँची।
सास-ससुर इन्दिरा नायक एवं छबिलाल नायक,श्रीमती शांता, सुदेश पटेल, शीतल,नयन पटेल ननद-नन्दोई,भांजी तथा देवर-देवरानी गोपाल कृष्ण नायक, श्रीमती माया,राहुल नायक सहित पूरे संयुक्त परिवार की जिम्मेदारियाँ उनके कंधों पर थीं। फिर भी उन्होंने कभी धैर्य नहीं छोड़ा। परिवार के अन्य सदस्यों के साथ उन्होंने रिश्तों को सहेजकर रखा, उन्हें जोड़कर रखा। देवर बेटा को पुत्रवत स्नेह रखते हुए उच्च शिक्षा के लिए वीआईटी विश्वविद्यालय विजयवाड़ा से एम-टेक कंप्यूटर साइंस शिक्षा के लिए स्वयं जाकर भर्ती कराया।
मां आदिशक्ति पर उनकी अटूट आस्था थी। विश्वास और श्रद्धा उनके जीवन का स्थायी आधार रहे। पूजा,संयम और सेवा उनके दैनिक आचरण का हिस्सा थे। वे स्नेह और दुलार से रिश्तों को निभाने वाली पर मर्यादा और कर्तव्य में अडिग रहने वाली महिला थीं।
29 दिसंबर 2025 को उपचार के दौरान उनका शिवलोक गमन हुआ। उनका असमय जाना केवल परिवार के लिए ही नहीं,बल्कि उस पूरे सामाजिक ताने-बाने के लिए एक अपूरणीय क्षति है,जिसमें वे एक स्थिर स्तंभ की तरह उपस्थित थीं। आज हमारा आंगन सूना है, पर उनके संस्कार,स्मृतियाँ और स्नेह की छाया परिवार के जीवन में सदा जीवित रहेगी।

श्रीमती कमला (नीलम) नायक का जीवन सादगी,कर्तव्य,विश्वास और पारिवारिक मूल्यों का मौन लेकिन सशक्त उदाहरण रहा—एक ऐसी जीवन-यात्रा, जो देह से विराम लेकर भी स्मृति और प्रेरणा के रूप में अनंत तक प्रवाहित होती रहेगी।
यह क्षण केवल एक देह के अवसान का नहीं,बल्कि धैर्य,सहनशीलता और मौन तपस्या से भरे लंबे संघर्ष की परिणति है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और परिवार को इस अपार दुःख को सहने का संबल दें।
✍️नमन🙏



