
चपले (राबर्टसन),खरसिया — खरसिया तहसील के चपले (राबर्टसन) ग्राम की पावन धरा पर आयोजित संगीतमय श्रीराम कथा में

श्रीराम विवाह कथा महोत्सव एक ऐसे दिव्य आयोजन के रूप में सामने आया, जिसने श्रद्धा,भक्ति और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को जीवंत कर दिया। आयोजन में श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति और वातावरण में गूंजते भजन-कीर्तन के बीच जैसे ही कथा व्यास जी ने उच्च स्वर में उद्घोष किया — “आज मेरे प्रभु राम की शादी है!”,सम्पूर्ण क्षेत्र भक्ति और उल्लास में सराबोर हो उठा।
प्रारंभ: यज्ञ की रक्षा और श्रीराम का शौर्य प्रदर्शन

कथा की शुरुआत भगवान श्रीराम के तेज और पराक्रम की प्रथम झलक से हुई। मुनि विश्वामित्र के यज्ञ में राक्षसों द्वारा विघ्न डाला जा रहा था। प्रभु श्रीराम ने अपने बाल रूप में ही शौर्य का परिचय देते हुए राक्षस सुबाहु का वध किया और मारीच को सौ योजन समुद्र पार भेज दिया। यह प्रसंग दर्शाता है कि जब धर्म पर संकट आता है,तब ईश्वर स्वयं अवतार लेकर उसकी रक्षा करते हैं।
अहिल्या उद्धार: करूणा,मर्यादा और पुनर्जन्म का प्रतीक

कथा का दूसरा प्रमुख प्रसंग था अहिल्या उद्धार। ऋषि गौतम की पत्नी अहिल्या को शापवश पत्थर बना दिया गया था। प्रभु श्रीराम ने अपनी चरणरज से उन्हें पुनः जीवन प्रदान कर दिया। यह प्रसंग श्रोताओं के हृदय को छू गया और कई श्रद्धालुओं की आँखें नम हो गईं। यह कथा यह संदेश देती है कि प्रभु केवल शक्ति के प्रतीक नहीं,बल्कि करूणा और मर्यादा का भी स्वरूप हैं।
रंगभूमि: शिव धनुष भंजन और विवाह का संकल्प

जब प्रभु श्रीराम जनकपुर की रंगभूमि में पहुंचे। वहाँ पहले से एकत्र हजारों राजाओं में कोई भी शिव धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने में सफल नहीं हो पाया था। जैसे ही श्रीराम ने सहज भाव से धनुष को उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाई, वह एक भयंकर गर्जना के साथ टूट गया। इस दृश्य ने श्रद्धालुओं को रोमांचित कर दिया।

राजा जनक की पुत्री,जनकनंदिनी सीता ने तत्काल प्रभु श्रीराम के गले में वरमाला डाल दी। यह विवाह का पावन दृश्य,भक्ति और प्रेम का चरमोत्कर्ष था। समस्त क्षेत्र “जय श्रीराम” और “जय सीता मैया” के जयकारों से गूंज उठा।
हास्य और विवेक: ‘सावन के गोबर’ पर विशेष टिप्पणी
कथा व्यास जी ने व्यंग्यात्मक अंदाज़ में उन अहंकारी राजाओं की ओर इशारा किया जो धनुष उठाने में असफल रहे — “स्वयंवर में दो ही थे, बाकी सब सावन के गोबर।” यह टिप्पणी उपस्थित भक्तों के मध्य हास्य का कारण बनी, पर साथ ही यह भी स्मरण कराती है कि अहंकार के साथ धर्म का पथ नहीं तय किया जा सकता।
सांस्कृतिक गौरव: ग्रामवासियों और राम रसिकों की उपस्थिति…

इस दिव्य आयोजन में चपले (राबर्टसन) सहित आस-पास के ग्रामों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आयोजन में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे — पत्रकार सुनील नामदेव, महासंघ जिलाध्यक्ष मुकेश पटेल, ग्राम पंचायत दर्रामुड़ा के उपसरपंच, हरदिहा पटेल समाज युवा प्रकोष्ठ उपाध्यक्ष कुश पटेल, लव पटेल, नरेंद्र पटेल, दिनेश पटेल, ठंडाराम पटेल, गिरीश राठिया, महेश्वर पटेल एवं हितेश पटेल।
एक प्रेरणादायी आयोजन: भक्ति, मर्यादा और जीवन मूल्यों की शिक्षा
https://www.youtube.com/live/1E8V4qUulMo?si=Tod0fMIxZRw4Ki1b
यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक एवं नैतिक जागरण का माध्यम भी बना। श्रीराम विवाह कथा ने ग्रामवासियों को मर्यादा, श्रद्धा, संयम, सेवा और नारी सम्मान जैसे मूल्यों की जीवंत अनुभूति कराई।
मन,वचन और कर्म की एकता का पर्व
श्रीराम कथा का भावविभोर कर देने वाले वातावरण में हो रहा है। श्रोताओं की आँखों में आनंद और संतोष का तेज देखा जा सकता है,चपले (राबर्टसन) की पुण्य भूमि पर पंडित अजय उपाध्याय श्रीमुख से रसास्वादन वर्षों तक जनमानस में जीवंत रहेगा।

श्रीराम कथा महोत्सव भक्ति, संस्कृति और जनभागीदारी एक साथ आती है, तो एक साधारण ग्राम भी आध्यात्मिक तीर्थ बन जाता है। आयोजक करने वाला राम कराने वाले राम निवेदक श्रीवास परिवार समस्त ग्राम चपले राबर्टसन क्षेत्रवासीगण की निष्ठा और आस्था ने 12 वर्ष तक कभी श्रीमद्भागवत कथा पुराण, तो कभी शिव पुराण,श्रीराम कथा का आयोजन कर एक ऐतिहासिक स्मृति में …

दिव्य दरबार में होगा हर समस्या का समाधान,माँ संतोषी और हनुमान जी के आशीर्वाद से लगेगा परचा
https://www.youtube.com/live/lfa3BiMJ-YY?si=AGKYzn84tz3-88G5
ग्राम चपले में आयोजित श्रीराम कथा पश्चात दिव्य दरबार में आस्था का अनोखा संगम देखने को मिलेगा, जहाँ श्रद्धालु माँ संतोषी और हनुमान जी के पावन आशीर्वाद से अपनी समस्याओं का समाधान पाएंगे। यह दिव्य दरबार 15 व 17 मई को आयोजित किया जाएगा, जिसमें पंडित अजय उपाध्याय की अगुवाई में श्रद्धालुओं को परचा (ईश्वरीय संकेत) के माध्यम से मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा।

श्री राम कथा के सम्पन्न होने के उपरांत कथा पंडाल मेंं, जिससे धार्मिक माहौल और अधिक भक्तिमय बन गया है। दिव्य दरबार निःशुल्क है और इसमें हर व्यक्ति अपनी व्यक्तिगत,पारिवारिक, स्वास्थ्य या अन्य जीवन की समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकता है।
ग्रामवासियों और आस-पास के श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि अधिक से अधिक संख्या में पहुँचकर इस दिव्य अवसर का लाभ उठाएं और अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएं।




