खरसियाछत्तीसगढ़रायगढ़

बानिपाथर,चोढ़ा,भालूनारा,देहज़री एवं नवागाँव में जनसम्पर्क के माध्यम से अपने आत्मीयजनों से मुलाकात के साथ लोकहित में निर्मित विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण,शिलान्यास किया…

खरसिया विकासखण्ड के विभिन्न गांवों के 46.40 लाख रुपये के विभिन्न कार्यों का किया लोकार्पण

बानीपाथर के आंगनबाड़ी केन्द्र भी पहुंचे,बच्चों को मिलने वाले पौष्टिक आहार की ली जानकारी

खरसिया। खरसिया विधानसभा क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी,खेल एवं युवा कल्याण मंत्री उमेश पटेल आज खरसिया विकासखंड के विभिन्न ग्रामों के दौरे पर रहे। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों को विभिन्न विकास कार्यों की सौगात देते हुए 46.40 लाख रुपये के कार्यों का लोकार्पण किया।

उच्च शिक्षामंत्री पटेल सर्वप्रथम बानीपाथर पहुंचे और लोगों से भेंट मुलाकात की। इसके साथ ही वे चोढ़ा, भालूनारा, देहजरी एवं नावागांव गांवों का भी जनसंपर्क किया।

कल तक जो सुविधाएं केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित थी,आज वह छत्तीसगढ़ शासन की योजनाओं के माध्यम से गांव-गांव तक पहुंच रही है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ शासन द्वारा हमारी परंपरा व संस्कृति को राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का कार्य हो रहा है।

आड़े हाथों लिए आरक्षण बिल टलने पर

उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का ये जीता जागता उदाहरण है. दरअसल छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से आरक्षण बिल को हस्ताक्षर के लिए राजभवन भेजा गया था लेकिन अभी तक राज्यपाल ने हस्ताक्षर नहीं किया है बजाय इसके राज्यपाल ने इस संबंध में छत्तीसगढ़ सरकार से कई सवाल किये थे. हालांकि इसका छत्तीसगढ़ सरकार ने जवाब दे दिया है.लेकिन अभी भी आरक्षण बढ़ाने के विधेयक को मंजूरी मिलेगी या नहीं इस पर संशय बरकरार है.

क्या है मामला

राज्यपाल का मानना है कि मामला कोर्ट में जाएगा तो सरकार 76 प्रतिशत आरक्षण को सही कैसे ठहराएगी. पता हो कि हाईकोर्ट ने 2012 के विधेयक में 58 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान को अवैधानिक करार दिया था. आदिवासियों का आरक्षण 32 से घटकर 20 प्रतिशत हो गया है, जिसका जमकर विरोध हुआ. इसके बाद राज्य में इसका विरोध हुआ था. बड़ा सवाल ये है कि जब कोर्ट ने 58 प्रतिशत आरक्षण को अवैधानिक घोषित किया है तो 76 प्रतिशत को कैसे वैध करार दे पाएंगे. नए बिल को लाया जा रहा था क्योंकि 19 सितंबर 2022 को छत्‍तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में 58% आरक्षण को असंवैधानिक बता दिया. उस समय हाई कोर्ट की पीठ ने आरक्षण की 58% सीमा को रद्द कर दिया था. पीठ ने कहा था कि आरक्षण की सीमा को 50% से ज्यादा बढ़ाया नहीं जा सकता.

विवाद किस बात पर है?

नए बिल में अनुसूचित जनजाति के लिए 32 फीसदी आरक्षण, अनुसूचित जाति के लिए 13 फीसदी आरक्षण, ओबीसी के लिए 27 फीसदी आरक्षण और EWS के लिए चार फीसदी आरक्षण दिया गया है. सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका है कि कहीं भी आरक्षण 50 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकता. ऐसे में विवाद होना ही है.

राज्य में पहले कैसा था आरक्षण का हिसाब
58 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था छत्तीसगढ़ में 2012 से थी. प्रदेश में 2012 से पहले SC को 16, ST को 20 और OBC 14 प्रतिशत आरक्षण मिलता था. इसे जोड़ा जाए तो 50 प्रतिशत आरक्षण. उस समय वहां बीजेपी की सरकार थी. इसके बाद बीजेपी की रमन सिंह की सरकार ने आरक्षण को बढ़ाकर 58% कर दिया. नए नियम के तहत SC को 16 प्रतिशत से घटाकर 12 प्रतिशत, ST को 20 से बढ़ाकर 32 प्रतिशत और OBC को 14 प्रतिशत ही आरक्षण मिलने लगा. उस समय बीजेपी सरकार के इस फैसले का जमकर विरोध किया और फैसले को 2012 में ही छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में चुनौती दे दी गई. करीब 10 साल तक केस चला और 19 सितंबर 2022 को अदालत ने 58% आरक्षण को असंवैधानिक बता दिया. इसके बाद बढ़े हुए आरक्षण के तहत जिन उम्‍मीदवारों को नियुक्तियां मिली वो वैसी ही रहीं लेकिन आगे की भर्तियों में कोर्ट के बताए नियमों का पालन किया गया.

बीजेपी पर हमलावर कांग्रेस

आरक्षण विधेयक पर अब तक हस्ताक्षर नहीं होने पर राज्य में कलह जारी है. मामले पर पीसीसी अध्यक्ष मोहन मरकाम ने बीजेपी पर हमला करते हुए कहा कि पार्टी संविधान बदलना चाहती है. आरक्षण देना नहीं चाहती,यह भाजपा और आरएसएस का हिडन एजेंडा है. मोहन मरकाम ने कहा है कि महामहिम ने ही सरकार को चिट्ठी लिखकर सत्र बुलाने को कहा था.उनकी मंशा के अनुरूप सरकार ने तत्परता दिखाई और विधेयक पास करवाया.अब भाजपा के दबाव में राज्यपाल हस्ताक्षर नहीं कर रही हैं. भाजपा 15 साल सरकार में रही है. सत्ता में कैसे आये इसकी तैयारी वो कर रही है, लेकिन इसका कुछ असर नहीं होगा.


उन्होंने कहा कि ग्राम बानीपाथर में सीसी रोड के कार्य आज पूर्ण हो चुके है तथा अन्य सीसी रोड के कार्य की स्वीकृति प्रदान की गई है। साथ ही हॉस्टल के लिए पहुंच मार्ग तैयार किया जाएगा। छत्तीसगढ़ शासन ग्रामीण, किसान, मजदूरों के लिए विशेष रूप से योजनाएं तैयार कर संचालित कर रही है। शासन की योजनाएं चाहे धान खरीदी हो या वनोपज का समर्थन मूल्य अथवा भूमिहीन किसानों के लिए राजीव गांधी कृषि ग्रामीण भूमिहीन मजदूर न्याय योजना सभी योजनाओं से ग्रामीणों और किसानों को लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि स्वामी आत्मानंद स्कूल के माध्यम से बच्चों को बिना फीस के चिंता किए अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में पढऩे का मौका मिल रहा है। जिससे वे भविष्य की प्रतियोगी माहौल के लिए ज्यादा बेहतर तरीके से तैयार हो सके।

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  उच्च शिक्षामंत्री पटेल ने इस दौरान बानीपाथर के मॉडर्न आंगनबाड़ी केन्द्र का भी निरीक्षण किया एवं बच्चों से मिले। वहां उन्होंने बच्चों को मिलने वाले पौष्टिक आहार की जानकारी ली। उन्होंने आंगनबाड़ी स्टॉफ को बच्चों का विशेष ध्यान रखने तथा निर्धारित आहार समय से बच्चों को देने के लिए निर्देशित किया। कार्यक्रम में ग्रामीणों ने स्थानीय स्तर की विभिन्न समस्याओं से उन्हें अवगत कराया।उच्च शिक्षा मंत्री पटेल ने अधिकारियों को समस्याओं के जल्द निराकरण के निर्देश दिए।



इस अवसर पर सरपंच ग्राम पंचायत देहजरी विजय राठिया, सरपंच बानीपाथर उत्तराबाई मांझी, चोढ़ा सरपंच हेमलता राठिया, नावागांव सरपंच विजय मांझी, उप सरपंच लालू प्रसाद राठिया, उप सरपंच जानकी बाई साहू, उप सरपंच कोवल राठिया, उप सरपंच घासी डनसेना,कुंजन साहू,रामकुमार,धनेश राठिया, लखन साहू, जमुना बाई राठिया,श्रवण कुमार, लव कुमार डनसेना,गिरवर साहू,योगेन्द्र, विनोद राठिया,भोगसिंह,शिवनारायण जायसवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि कांग्रेस युवा कांग्रेस,महिला कांग्रेस के पदाधिकारी, खरसिया विकास खण्ड के अधिकारी कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में ग्राम के गणमान्य नागरिक माता बहनों के गौरवपूर्ण  उपस्थित रहे।

इन कार्यों का हुआ लोकार्पण

उच्च शिक्षामंत्री पटेल ने आज 46 लाख 40 हजार रुपये के विभिन्न कार्यों का लोकार्पण किया। इनमें ग्राम बानीपाथर में 10.50 लाख रुपये की लागत से सामुदायिक भवन एवं 1 लाख रुपये की लागत से सांस्कृतिक चबुतरा,

ग्राम-देहजरी में दो आंगनबाड़ी भवन के लिए 12.90 लाख रुपये, पचरी निर्माण के लिए 1.50 लाख रुपये, ग्राम-नावागांव में मल्टी एक्टीविटी शेड के लिए 6.70 लाख रुपये, वर्मी टांका के लिए 4.80 लाख रुपये, वर्मी भण्डारण के लिए 1 लाख रुपये, मुर्गीपालन शेड के लिए 4.50 लाख रुपये, चबुतरा निर्माण के लिए 1.50 लाख रुपये तथा चबुतरा निर्माण के लिए 2 लाख रुपये का लोकार्पण कार्य शामिल है।

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Gopal Krishna Naik

Editor in Chief Naik News Agency Group

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