
अपनेपन की महक थी
शहीद नंदकुमार पटेल की बातों मे…
केलोआई शहीद नंदकुमार पटेल की जयंती 8 नवंबर पर कुछ बताना चाहता हूँ कि वे जनसभाओं मे अपनी बात कैसे रखते थे. इसलिए नहीं कि वि. स. चुनाव के मद्देनजर ऊँची ऊँची हाँकने वालों को नीचा दिखाना चाहता हूँ और न ही कोई चुनावी उद्देश्य है शब्दों का।
बाहैसियत शहीद नंदकुमार पटेल का मीडिया प्रभारी होने के नाते मुझे साये की तरह सार्वजनिक कार्यक्रमों मे साथ जाना होता और उनका भाषण सुनना जरूरी होता था, वे अक्सर जन सभाओं को संबोधित करते हुए कहा करते थे… आपके यहां बहुत से काम हुए और भी बहुत से काम बाकी हैं जिसमें कुछ बडे़-बडे़ काम भी शामिल हैं जिसके लिए सब मिलकर कोशिश करेंगे आज मै सिर्फ इतना ही कहना चाहता हूँ
कन्हू मेर तुहँर तरी मूड नी होन दँ
तात्पर्य है कि मै ऐसा कोई काम नहीं करूंगा जिससे खरसिया वि. स. के नागरिकों का कहीं भी सिर नीचा हो।
चलती-फिरती धूप-छांव से चेहरा बाद में बनता है
पहले पहले सभी ख़्यालों से तस्वीर बनाते हैं।
आँखों देखी कहने वाले पहले भी कम-कम ही थे
अब तो सब ही सुनी सुनाई बातों को दोहराते हैं।
इस धरती पर आकर, अपना कुछ खो जाता है
कुछ रोते हैं, कुछ इस ग़म में अपनी ग़ज़ल सजाते हैं।
केलोआई निवेदन है यादोँ के इन शब्द पुष्पों को महक सहित उन तक पहुँचा देना।




