
रायगढ़ । जिले में यदि कोई सबसे विवादित उद्योग है तो वो है एनटीपीसी लारा। आज से 8 वर्ष पूर्व जब जमीन अधिग्रहित हुआ तो शासन के गाइडलाईन के अनुसार क्षेत्र के प्रभावित प्रत्येक परिवार के कुल सदस्यों के उनके शैक्षणिक योग्यतानुसार एक सर्वे कराया गया था उस सर्वे के अनुसार कितने लोगों को एनटीपीसी ने पुनर्वास नीति के तहत रोजगार उपलब्ध करवाया है और तब से लेकर आज तक बेरोजगारों की संख्या में कितनी बढ़ोत्तरी हुई है यह सब एक विचारणीय तथ्य है। आखिर एनटीपीसी एक सरकारी उपक्रम होते हुए भी शासन के नियम-कानून की धज्जियां क्यों उड़ा रही है।
शासन के आदेशानुसार चिन्हांकित भू-विस्थापितों को उनके शैक्षणिक योग्यतानुसार नौकरी उपलब्ध कराने के लिए लारा संघर्ष के आंदोलन का आज चौथा दिन रहा। आज राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस पर क्षेत्र के बेरोजगारों ने लारा संघर्ष के बैनर तले हुंकार भरते हुए कहा कि जब तक एनटीपीसी रोजगार मुहैया नही कराती आंदोलन जारी रहेगा।
आज हड़ताल स्थल पर क्षेत्र के युवा बेरोजगार अपने हक के लिए भारी संख्या में उपस्थित थे। क्षेत्र के शिक्षित युवा बेरोजगारों ने केंद्र की एनटीपीसी हुकूमत से एक स्वर में कहा कि – “न चोर हैं न चौकीदार हैं, नौकरी दो साहब हम तो बेरोजगार हैं।”




