छत्तीसगढ़

शासन की गोधन न्याय योजना वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन की दिशा में है मील का पत्थर

मोखला गांव की महिलाएं स्वालंबन की दिशा में मजबूती से बढ़ा रही कदम

राजनांदगांव । जब मन में कुछ कर गुजरने का जुनून हो तो मंजिल मिल ही जाती है। इसकी एक बानगी ग्राम मोखला के जय मां अम्बे स्वसहायता समूह की महिलाओं ने पेश की है। शिवनाथ नदी के किनारे बसे गौठान में महिलाएं वर्मी कम्पोस्ट बना रही है, जिससे उने जीवन में समृद्धि आ रही है। शासन की गोधन न्याय योजना वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन के कार्य में मील का पत्थर साबित हो रही है।


महिला स्वसहायता समूह की अध्यक्ष श्रीमती कलिन्द्री साहू ने कहा कि घर की चारदीवारी से निकलकर खुद की पहचान बनाने एवं आत्मनिर्भर होने के लिए की गई हमारी कोशिश और मेहनत रंग ला रही है। वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन का कार्य हम 10 महिलाओं ने आरंभ किया, जिससे संकोच दूर हुआ और आत्मविश्वास बढ़ा है और हमारी तरक्की के रास्ते खुले है। उन्होंने बताया कि 84 हजार रूपए का केंचुआ अब तक विक्रय कर चुके हैं वहीं वर्मी कम्पोस्ट बनाकर भी ग्रामवासियों को एवं कृषि उद्यानिकी एवं वन विभाग को भी दे रहे हैं।

समूह की सचिव श्रीमती कुंती साहू ने कहा कि गोधन न्यााय योजना से वर्मी कम्पोस्ट निर्माण के कार्य को गति  मिली है। उन्होंने बताया कि गौठान में 45 वर्मी बेड है जिनमें क्रय किए गए गोबर से वर्मी कम्पोस्ट बनाने का कार्य जारी है। वर्मी बेड में अच्छी गुणवत्ता के वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण किया जा रहा है। चरवाहा नरेश ने कहा कि गोधन न्याय योजना से गोबर खरीदी एवं वर्मी कम्पोस्ट के निर्माण से समूह की महिलाओं एवं किसानों को फायदा होगा। समूह में गीतांजली साहू, विधिका साहू, खिलेश्वरी साहू, पुष्पा साहू, पेमिंद साहू, लीला साहू, प्रतिमा साहू है। समूह की महिलाओं द्वारा गोबर के गमले एवं फेसिंग तार का निर्माण किया जा रहा है। वहीं गौठान की बाड़ी में भिंडी, लौकी, कद्दू, खट्टाभाजी, तरोई जैसी सब्जियों का उत्पादन कर आस-पास के गांवों में विक्रय किया जा रहा है।

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