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जनशताब्दी एक्सप्रेस की पैसेंजर से भी बदतर हो गई है चाल…चौधरी सा एक ट्वीट तो बनता है…

ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने के टारगेट पर काम कर रही रेलवे रायगढ़-बिलासपुर के मध्य फेल

रायगढ़। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे गोंदिया से लेकर झारसुगुड़ा तक एक्सप्रेस ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने के लक्ष्य पर काम कर रही है। इसके लिए तीसरी व चौथी लाइन को दुरूस्त करने युद्धस्तर पर काम किया जा रहा है जबकि इधर दूसरी ओर दिन ब दिन पैसेंजर के साथ एक्सप्रेस ट्रेनों की चाल बिगड़ते ही जा रही है। खासकर जनशताब्दी एक्सप्रेस की चाल तो पैसेंजर से भी बदतर हो गई है। रोजाना यह ट्रेन घंटों विलंब से रायगढ़ पहुंच रही है। स्थिति यह है कि इसकी चाल को देख लोग अब इसमें सफर करने से भी कतराने लगे हैं।

रायगढ़ से गुजरने वाली लगभग सभी ट्रेनें इन दिनों एक से दो घंटे विलंब से चल रही हैं। ऐसे में इन ट्रेनों से यात्रा करने वाले यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एक्सप्रेस ट्रेनों के लेट-लतीफी चलने के कारण पैसेंजर टे्रनें भी लेट हो रही हैं। खासकर पिछले कुछ महीनों से यह परेशानी ज्यादा बढ़ी है।

आउटर पर यात्री ट्रेनों को खड़ी कर मालगाडिय़ों को पहली प्राथमिकता दी जा रही है। इसके चलते यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर रायगढ़ से गोंदिया तक जाने वाली जनशताब्दी एक्सप्रेस सबसे ज्यादा यात्रियों को रूला रही है। इसकी चाल इतनी बिगड़ गई है कि रायगढ़ से बिलासपुर दो-दो घंटे देरी से पहुंच रही है।

ऐसे में अब यात्रियों का कहना है कि एक तो पैसेंजर ट्रेनों की अपेक्षा तिगुना किराया भी दे रहे हैं, इसके बाद भी समय से नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे ज्यादातर लोग अब लोकल ट्रेनों का सहारा लेना शुरू कर दिया है क्योंकि हर दिन जनशताब्दी को रायगढ़ पहुंचने में रात के 12 से एक बज जा रहा है, जिससे भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं रायगढ़ से जाते समय भी बिलासपुर पहुुंचने का समय 8ः30 बजे है, लेकिन हर दिन 9ः30 बजे के बाद ही पहुंच रही है।

रेलवे को यात्री सुविधाओं से सरोकार नहीं

जनशताब्दी एक्सप्रेस की यह समस्या पिछले कई महीनों से बनी हुई है। इसके अलावा अन्य ट्रेनों में भी लेटलतीफी का दौर जारी है। स्पेशल का टैग लगाकर चलाये जा रहे टिटलागढ़ पैसेंजर की भी यही स्थिति है। अप और डाउन दोनों दिशाओं की ट्रेनों में मुसाफिरों को अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए हलाकान होना पड़ता है। दिसंबर से वैसे ही ट्रेनों के कैेंसिल होने का दौर लगातार जारी है। ऐसे में जो ट्रेनें चल रही हैं उसी में यात्रा करना मुसाफिरों की मजबूरी है। ऐसा नहीं है कि रेलवे इससे अनभिज्ञ है बावजूद इसके ट्रेनों की चाल सुधारने और यात्रियों को सुविधा प्रदान करने में उनकी कोई रूचि दिखाई नहीं दे रही है।

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