छत्तीसगढ़

सफलता की कहानी : वन धन विकास योजना से संवर रहा स्व सहायता समूह की जिंदगी

दंतेवाड़ा । जिले वन जैव विविधता के दृष्टिकोण से काफी समृद्ध है। इमली, महुआ फूल, तेंदूपत्ता के अतिरिक्त उच्च गुणवत्ता के कई अन्य लघु वनोपज भी पाये जाते हैं। यहां के निवासियों के जीविकोपार्जन का मुख्य साधन कृषि व वनों पर निर्भर हैं। लघु वनोपज के संग्रहण, प्रसंस्करण व मूल्यवर्धन केलिए शासन की ओर से वर्ष 2019-20 से वनधन विकास योजना संचालित है, जिसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के महिला स्व-सहायता समूहों की ओर से संग्राहकों से लघु वनोपज का संग्रहण, प्राथमिक प्रसंस्करण व मूल्यवर्धन कार्यों का सम्पादन कर रोजगार प्राप्त करना है। वन धन विकास योजना से क्षेत्र के सैकड़ों जनजातीय लोगों को रोजगार मिल रहा है। वोकल फॉर लोकल तथा आत्मनिर्भर भारत अभियान को बढ़ावा देने वाले इस योजना से जनजातीय लोगों की आय और आजीविका में सुधार हो रहा है और समूह की महिलाओं के जीवन में बदलाव देखने को मिल रहा है।

जिला यूनियन अंतर्गत लघु वनोपज संग्रहण केलिए 14 संग्रहण केन्द्र (हाट बाजार) व 07 वन धन विकास केन्द्र (लघु वनोपज प्रसंस्करण केन्द्र) के लिए प्रत्येक संग्रहण केन्द्र केलिए 5.00 लाख रुपए व प्रत्येक वन धन केन्द्र केलिए 19.06 लाख रुपए राशि स्वीकृत कर जिला कलेक्टर व डी.आर.एम. की ओर से वकर्शेड/गोदाम का निर्माण कराया गया है।

क्षेत्र के 257 महिला स्व-सहायता समूहों के लगभग 3000 सदस्यों की ओर से विभिन्न स्तरों (संग्रहण स्तर-ग्राम व हाट बाजार, प्रसंस्करण स्तर-वन धन विकास केन्द्र) में लघु वनोपज का संग्रहण व प्रसंस्करण कर रोजगार प्राप्त कर रहे है। इन वन धन केंद्रों में तैयार उत्पाद बाजार में बेचे जा रहे हैं। इस योजना की खूबसूरती यह है कि बिक्री से प्राप्त सभी लाभ सीधे तौर पर जनजातीय उद्यमियों को जाते है। क्षेत्र के ग्रामीण व महिलाएं वन धन विकास योजनाह्व से लाभ अर्जित कर अत्यंत खुश हैं। साथ ही शासन-प्रशासन को धन्यवाद दे रहे है।

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