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प्रसूति-स्त्री रोग विभाग में दूरबीन पद्धति से इलाज पर हुआ वर्कशॉप

रायपुर । पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में पोस्ट ग्रेजुएट छात्र-छात्राओं की ट्रेनिंग के लिए आई. ए. जी. ई. (इंडियन एसोसिएशन ऑफ गायनोकोलॉजिकल एंडोस्कोपिस्ट्स) के ईगल (एवरी एस्पाइरिंग गायनेकोलॉजिस्ट लर्न्स एंडोस्कोपी) प्रोजेक्ट का एक दिवसीय वर्कशॉप का आयोजन किया गया। यह आयोजन डीन डॉ. तृप्ति नागरिया एवं विभागाध्यक्ष डॉ. ज्योति जायसवाल के नेतृत्व में किया गया।

इस वर्कशॉप की ट्रेनिंग प्रदान करने डॉ. अनुराग भाटे विशेषकर मुंबई से उपस्थित हुए। इस कार्यक्रम की विशेष अतिथि पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति महाविद्यालय रायपुर की पूर्व डीन डॉ. आभा सिंह रहीं। कार्यक्रम में डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एस. बी. एस. नेताम भी शामिल हुए।

ईगल प्रोजेक्ट के रायपुर के चेयरपर्सन डॉ. मनोज चेलानी, सेक्रेटरी डॉ. विनीता सिंह, पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर की वर्तमान डीन डॉ. तृप्ति नागरिया, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ज्योति जायसवाल और कोऑर्डिनेटर डॉ. प्रतिभा लंबोदरी के नेतृत्व में विभाग के सभी सीनियर डॉक्टरों एवं पी. जी. छात्र छात्राओं ने इस वर्कशॉप से क्लीनिकल एवं सर्जिकल ज्ञान एवं प्रशिक्षण आयुष्मान एंडोसर्जरी यूनिट की ओ. टी. में प्राप्त की। इस कार्यक्रम में दूरबीन पद्धति द्वारा गर्भाशय की बीमारियों की जांच की गई। गर्भाशय के फाइब्रॉएड को निकाला गया। पूर्व में ऑपरेशन हुए मरीजों की धंसी हुई कॉपर टी निकाली गई। बांझपन के मरीजों की डायग्नोस्टिक एवं थेराप्यूटिक जांच की गई। एंडोमेट्रियोमा को निकाला गया। गर्भाशय की विभिन्न विकृतियों की जांच एवं ऑपरेशन किये गए।

आज के आधुनिक युग में दूरबीन पद्धति से इलाज करना मरीजों के लिए काफी लाभप्रद है। अतः इस पद्धति की ट्रेनिंग करवाकर पीजी छात्र-छात्राओं एवं सभी सीनियर एवं जूनियर डॉक्टरों ने लाभ प्राप्त किया जिससे वे भविष्य में कई मरीजों को उचित इलाज कर लाभ प्रदान कर सकते हैं। दूरबीन पद्धति से पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में पहले से ही मरीजों का इलाज किया जा रहा था परंतु इस वर्कषॉप के आयोजन के पश्चात् विभाग में और अधिक गुणवत्ता से मरीजों का उपचार किया जा सकेगा। छात्र-छात्राओं की ट्रेनिंग हेतु यह एक सराहनीय प्रयास है।

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