छत्तीसगढ़

जैविक खेती अपनाने से दुगनी हुई राधेलाल की आय

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही – जैविक खेती अपनाने से मुझे गत वर्ष की तुलना में दो गुना से भी अधिक आय प्राप्त हुआ। अब मै हमेशा रासायनिक खेती छोड़कर जैविक खेती ही करूंगा और सुगन्धित धान को जैविक खेती के रूप मे मुख्य फसल लूंगा। यह कहना है विकासखण्ड पेन्ड्रा के ग्राम लाटा निवासी राधेलाल भैना का।
किसान भैना ने अपनी जुबानी में बताया कि वन अधिकार पट्टा से प्राप्त मेरी कुल भूमि 1.52 एकड़ है। जिसमें 8-10 वर्षो से पारम्परिक खेती में धान, उड़द, मक्का की खेती करता रहा जिसमे अधिकतम आय 15 से 17 हजार रूपए का लाभ होता रहा किन्तु इस वर्ष कृषि विभाग की जैविक खेती मिशन अंतर्गत सुगन्धित धान (छत्तीसगढ़ भोग) का फसल प्रदर्शन लगाया। इससे मुझे फसल की उत्पादन 1 एकड़ में 20 क्विंटल प्राप्त हुआ। जिसे मैने 3 हजार रूपए प्रति क्ंिवटल से बेचा। इससे मुझे 60 हजार रूपए की राशि प्राप्त हुई। जैविक खेती में कुल खर्च 12 हजार रूपए आया जिससे मेरी शुद्ध आय 48 हजार रूपए रही पहले मुझे पारम्परिक खेती करने से शुद्ध आय 21 हजार रूपए होती थी।

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