नंद घर आनंद भयो की गूंज से गुंजायमान हुआ पूरा गांव दर्रामुड़ा…

आचार्य दीपककृष्ण ने सुनाया श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग, भक्तों में छाई उमंग…
पंडित दीपककृष्ण के मुखारविंद से बह रही पावन भागवत गंगा…
खरसिया - खरसिया के ग्राम दर्रामुड़ा बीच बस्ती में श्रीमद्भागवत कथा का भक्तिमय आयोजन किया जा रहा है। श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन 24 दिसंबर शुक्रवार को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। जन्मोत्सव की झांकी निकलते ही श्रद्धालु पुष्प की वर्षा करने लगे। जन्मोत्सव में संगीतकार के सुंदर भजनों पर श्रद्धालु खूब झूमे। भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों तथा नन्द के आनंद भयो जय कन्हैयालाल की जयघोष से वातावरण गूंजमान हो उठा।
इस दौरान श्रद्घालु प्रभु की भक्ति में भाव विभोर होकर हर्ष के साथ झूम उठे। बाबा नंद के सिर पर टोकरी में बैठे नन्हे कृष्ण की एक झलक पाने के लिए पंडाल में बैठे श्रद्घालु आतुर हो गए। इस दौरान कथा स्थल का पूरा पांडाल गुब्बारों एवं फूल पत्तियों से ब्रज धाम की तरह तब्दील हो गया और हाथी घोडा पालकी जय कन्हैया लाल की जय हो नंद लाल की जय यशोदा लाल की। जैसे मंगल गीतों की ध्वनि गूंजती रही। वहीं जमकर आतिशबाजी भी हुई।
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श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन अंचल के प्रख्यात कथा प्रवक्ता पंडित दीपककृष्ण महाराज जी ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाया। महराज जी ने कहा कि जब-जब गौ ब्राह्मणों और संतों पर अत्याचार होता है, तब किसी न किसी रूप में प्रभु अवतरित जरूर होते हैं और अधर्मियों को समूल नष्ट करके पुनः धर्म स्थापित करते हैं। वहीं कहा कि श्रीकृष्ण ने स्वयं नारद से कहा था कि नाहं वसामि वैकुंठे योगिनां हृदये न च, मद्भक्ता यत्र गायन्ति तत्र तिष्ठामि नारद। जहां भी भक्त तन्मय होकर मेरा स्मरण करते हैं, वहां मैं जरूर पहुंचता हूं। आचार्य पंडित दीपककृष्ण महाराज जी ने कहा कि कलयुग में इस तरह के आयोजन ही धर्म की धुरी को स्थापित रखते हैं।
समस्त ग्रामवासियों के सहयोग से कथा का आयोजन प्रतिदिन दोपहर 02 बजे से राधे कृपा तक होगा। कथा का समापन 28 दिसंबर को पूर्णाहुति के साथ किया जाएगा।




