
किरीतमाल, खरसिया।गांव के स्कूल भवन से जुड़ी एक चौंकाने वाली और दुःखद स्थिति सामने आई है। गांव के बच्चों को जहां शिक्षा के मंदिर में भविष्य गढ़ने का अवसर मिलना चाहिए, वहां वे जलभराव,सीलन और खस्ताहाल भवन में रोज़ाना खतरे से जूझ रहे हैं।
मीडिया को मिली जानकारी के अनुसार, किरीतमाल प्राथमिक शाला के पुराने भवन में बरसात के मौसम में जलभराव हो जाता है। बच्चों की पढ़ाई बाधित होती है,फिसलन और बीमारी का डर अलग से बना रहता है।

कौन है जो बच्चों को फोटो खिंचाने जल भराव के जगह भेज रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नए भवन का निर्माण पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के मुख्यमंत्री कार्यकाल में लाखो का भवन पूरा हो चुका है, तो फिर आज तक वह “हेड ओवर” क्यों नहीं हुआ?
क्या यह देरी गांव के राजनीतिक कारणों से हो रही है? क्या बच्चों के भविष्य को जान-बूझकर राजनीतिक लाभ-हानि के तराजू पर तौला जा रहा है?
नौनिहालों को संकट में डालना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि यह देरी लापरवाही या राजनीतिक द्वेष का परिणाम है,तो जिम्मेदारों कि जिम्मेदारी तय करते हुए सख़्त कार्यवाही की जानी चाहिए।
प्रशासन और शिक्षा विभाग को चाहिए कि बिना किसी और देरी के नए भवन का हेड ओवर कार्यवाही पूरी करें, ताकि मासूम बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण में पढ़ाई का अवसर मिल सके।




