
रायपुर-प्रदेश में एक आरक्षक की तकलीफ इतनी ज्यादा थी कि वह अपना दर्द बयां नहीं कर पा रहे थे। यह सब देख पास में मौजूद दस साल की बेटी ने पिता का दर्द कैमरे के सामने बयां किया। मौका था डीजीपी के स्पंदन कार्यक्रम का, जब डीजीपी डीएम अवस्थी पुलिस परिवार के सदस्यों की समस्या गुरुवार को वीडियो कॉल के माध्यम से सुन रहे थे। आरक्षक हरवंश यादव अपनी बात रखने के लिए जब कैमरे के सामने आए, तो वे अपनी तकलीफ बयां नहीं कर पा रहे थे।
उन्हें मुंह का कैंसर है। हरवंश से जब अपनी तकलीफ कही नहीं गई तो उनकी दस साल की बिटिया ने कैमरे पर आकर पिता की समस्या को डीजीपी को बताया। उसने बताया कि पिता रामानुजगंज में पदस्थ हैं, अगर उनका कांकेर स्थानांतरण कर दिया जाए तो परिवार उनकी देखभाल बेहतर तरीके से कर सकेगा।
बस्तर में पदस्थ निरीक्षक सुरेंद्र कुमार बघेल ने डीजीपी को बताया कि कोरोना से मेरे घर में तीन लोग पिता, पत्नी और बहन की मौत हो गई। बघेल ने नम आंखों से कहा कि राजधानी रायपुर में दो छोटे-छोटे बच्चे अकेले रह रहे हैं, उनकी देखरेख के लिए कोई नहीं है। मैं यहां बस्तर में पदस्थ हूं, इसलिए बच्चों की देखभाल में बहुत दिक्कत आ रही है।
मैनपाट से प्रीतिका एक्का ने बताया कि सुकमा में पदस्थ पति की हार्ट अटैक के बाद ओपन हार्ट सर्जरी हुई है। मैनपाट स्थानांतरण होने से वे उनकी अच्छे से देखभाल कर पाएंगी। आरक्षक टोपेंद्र कुमार साहू ने बताया कि उनकी दोनों किडनी फेल हैं। पिता की एक किडनी उन्हें ट्रांसप्लांट की गई है, लेकिन वह सफल नहीं हुई। तबीयत नाजुक रहती है।
दूसरी बटालियन संकरी से प्रथम बटालियन भिलाई स्थानांतरण चाहते हैं। एएसआइ रघुवर सिंह राजपूत ने बताया कि वे 26 वर्ष से बस्तर में पदस्थ हैं, उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है। सुकमा से मुंगेली में तबादला चाहते हैं। सबकी समस्याएं सुनने के बाद डीजीपी ने स्वास्थगत कारणों से ट्रांसफर बोर्ड की अनुशंसा से सभी का स्थानांतरण आदेश जारी कर दिया।




