जो सच्चा ज्ञानी होता है वही समाज में ज्ञान का प्रकाश फैलाता है – अतुल जी महाराज

प्रभु श्रीराम ने कहा कि भरत को रघुवंश का हंस है।
खरसिया। श्री रामकथा के सप्तम दिवस भरत चरित्र चित्रण प्रसंग के अवसर पर अंतराश्ट्रीय मानस मर्मज्ञ परम पूज्य अतुल कृष्ण जी महाराज ने उपस्थित लोगो को बताया कि भरत व केंवट से त्याग व भक्ति की प्रेरणा लेनी चाहिए। क्योंकि श्रीराम और भरत ने संपत्ति का ंटवारा नहीं किया वरन विपत्ती का बंटवारा किया और कंवट ने जो समर्पित भाव से भगवान राम के पैर धोये थे साथ ही उन्होने कहा कि दुनिया की कोई भी माॅं अपने बेटो को कष्ट नहीं देती है। शीशराम ओमप्रकाश परिवार के आयोजकत्व में खरसिया नगर मे ंचल रहे इस मानस कथा सुनने नगर सहित ग्रामीण क्षेत्र के हजारों की संख्या मे ंलोग पहुंच कर श्रीराम कथा का श्रवण कर पुण्य के भागी बन रहे है।
खरसिया की पावन धरा पर शीशराम ओमप्रकाश परिवार द्वारा आयोजित दिनांक 28 दिसंबर से प्रारंभ हुए श्रीराम कथा सप्ताह के सातवें दिन उपस्थित श्रोताओं को मानस मर्मज्ञ परम पूज्य अतुल कृष्ण जी ने संबोधित करते हुए कहा कि वन गमन के समय श्रीराम की भेंट उनके प्रिय सखा निषाद राज गुजु से हुआ। तत्पश्चात गंगा नदी पार करने के लिये भगवान राम केंवट से मिल। भगवान को साक्षात सामने पाकर केंवट अपनी व्यथा सुनाई। केंवट ने कहा कि जब तक आप अपना पैर नहीं धुलवाऐगें तब तक मै आपको नदी पार नहीं कराउंगा। अंत में भगवान को केंवट के सामने विवश होकर केंवट से चरण धुलवाने पडे।

इस दौरान केंवट को भगवान के चरण पकड़ने का अवसर प्राप्त हुआ। जिससे उसके साथ साथ उसकी समस्त पीढी तर गई। आचार्य श्री ने आगे कहा कि आप सभी यदि सच्चे मन से भगवान की भक्ति करेगें तो भगवान के दर्षन प्राप्त होगें और आप भी तर जायेगें। कथ व्यास श्री अतुल कृश्ण भारद्वाज जी ने राम भरत मिलन प्रसंग सुनाते हुए कहा कि प्रभु राम, भरत को रघुवंश का हंस कहा। भरत प्रेमरूपी अमृत के सागर है। भरत चित्रकूट से श्रीराम की चरण पादुका लेकर आये। चरण पादुका को ही सिंहासन पर रखकर भगवान के अयोध्या वापस आने के पूर्व ही राम राज्य की स्थापना कर डाली। उन्होने श्रोताओ से कहा कि हम सभी को अपनी योग्यता बढ़ानी होगी। देश के पूर्व राष्ट्रपति अक्दुल कलाम ने गीता का सार अध्ययन करने के बाद अपनी योग्यता का विस्तार कर अपना पूरा जीवन राश्ट्र की उन्नति हेतु लगा दिया। स्वामी विवेकानंद जी ने अमेरिका में वेंदात का प्रचार कर अध्यात्म की दिशा में भारत को विश्व का सिरमौर बनाया। जो सच्चा ज्ञानी होता है वही समाज में ज्ञान का प्रकाश फैलाता है।
उन्होने कहा कि कनिष्ठ भी अपने गुणो से श्रेष्ट हो सकता है। क्योंकि श्रेष्ठता सदैव गुणो पर ही निर्भर करता है। विषम परिस्थिति में कष्टों को झेलने को देखने का प्रयास करना चाहिए। श्रेष्टता प्राप्त करने का यह प्रथम सोपान है। भरत से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए कि त्याग व भक्ति ही सदैव श्रेष्ट होता है। शीशराम ओमप्रकाश परिवार के आयोजकत्व में खरसिया नगर मे ंचल रहे इस मानस कथा सुनने नगर सहित ग्रामीण क्षेत्र के हजारों की संख्या मे ंलोग पहुंच कर श्रीराम कथा का श्रवण कर पुण्य के भागी बन रहे है। आयोजक परिवार ने क्षेत्रवासियों से अपील किया है कि वे श्रीराम कथा सप्ताह के अष्टम दिन शबरी प्रसंग एवं सुदरकांड प्रसंग अवसर पर शामिल होकर पुण्य के भागी बनें।




