श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ने कहा कि हमें अपने मतभेद भुला कर कौम के लिए श्री अकाल तख्त साहिब की सरपरस्ती में बैठना होगा। अपनी इस ताकत को कभी कमजोर नहीं होने देना। हमारा राजनीतिक विरोध होना चाहिए लेकिन इसकी आड़ में अपनी ताकत को कमजोर नहीं होने देना।
तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कौम के नाम संदेश पढ़ा और इससे पहले पढ़ी गई अरदास में जरनैल सिंह भिंडरावाले, बाबा ठारा सिंह और जरनैल सुबेग सिंह को कौम का शहीद करार दिया। इस दौरान खालिस्तान जिंदाबाद के नारे भी लगे और लाल किले पर झंडा फहराने वाले दीप सिद्धू भी समागम में पहुंचे। श्री हरमंदिर साहिब के अंदर खालिस्तान झंडे और अलगाववादी जरनैल सिंह भिंडरावाले के पोस्टर भी दिखाई दिए। प्रशासन ने पूरे अमृतसर की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।
श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कौम के नाम संदेश में कहा कि 37 साल पहले भारत की सेना ने पाकिस्तान और चीन की तरह श्री हरमंदिर साहिब पर टैंकों और तोपों से हमला किया और विजेता सेना की तरह सिखों के साथ व्यवहार किया।
यह हमला सिख कौम की पीठ पर नासूर है, जो भरता है, दर्द देता है और हर साल खालिस्तान जिंदाबाद कह कर हम इस दर्द को कम करने का प्रयास करते हैं। हमें पता है कि इस नसूर का इलाज कैसे करना है। क्या इसकी दवा है और कैसे प्राप्त करना है। 37 साल पहले श्री अकाल तख्त साहिब और देश के विभिन्न हिस्सों में 37 गुरुद्वारों पर हुए हमले में सिख शहीद हुए।
उन्होंने मीडिया से कहा कि वे घल्लूघारे को साका नीला तारा या ब्लू स्टार नहीं लिखें, क्योंकि यह सरकारी भाषा है। घल्लूघारे का अर्थ सर्वनाश होता है और जब मीडिया इसे साका नीला तारा या ब्लू स्टार लिखते हैं तो उन्हें दर्द होता है।
ध्यान सिंह मंड ने भी श्री अकाल तख्त से हुक्मनामा जारी किया और कहा कि घल्लूघारे सिख कौम का मनोबल नहीं तोड़ सके। मंड ने 1984 में श्री दरबार साहिब हमले को लोकतंत्र का बुरका पहन विश्व की तीन ताकतों की मदद से किया गया हमला बताया। बेअदबी मामले में अकाली दल और कांग्रेस दोनों की मिलीभगत स्पष्ट हो गई है और दोनों एक दूसरे को बचाने की कोशिशें कर रहे हैं।
सचखंड श्री हरमंदिर साहिब के अंदर गरम ख्याली सिमरनजीत सिंह मान और दीप सिद्दू भी पहुंचे। सिमरनजीत सिंह मान ने कहा है कि 37 साल से आज का दिन घल्लूघारे के रूप में मना रहे हैं। उन्होंने आज के दिन को खालिस्तान डे बताया।
वहीं इस मौके पर किसान आंदोलन के दौरान लाल किले पर झंडा लहराने वाले दीप सिद्धू ने पत्रकारों से बातचीत की और 37 साल पहले हुए इस घटनाक्रम को निंदनीय बताया। कहा कि जिस तरह से 37 साल पहले बेगुनाह लोगों को मौत के घाट उतारा गया, वह सब अब आगे आ रहा है। सिद्धू ने कहा कि अगर किसान आंदोलन के अंदर हम अपने हक के लिए कोई नारा लगा देते हैं तो हम पर देशद्रोही का टैक लग जाता है। राजनीति का एक ऐसा सिस्टम बन गया है कि आपको कभी भी इंसाफ नहीं लेने दिया जाएगा।
सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
अमृतसर की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। स्थानीय पुलिस के अलावा अमृतसर देहात और पीएपी जालंधर के पुलिस बल की शहर के महत्वपूर्ण स्थानों पर तैनाती की गई है। शहर में लगभग सात हजार जवान तैनात हैं। पुलिस कमिश्नर डॉ. सुखचैन सिंह गिल शहर की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और समय-समय पर बल के सीनियर अधिकारियों के साथ बैठक करके स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं।
विस्तार
ऑपरेशन ब्लू स्टार की 37वीं बरसी पर श्री अखंड पाठ साहिब के भोग डाले गए। इस दौरान श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कौम के नाम संदेश पढ़ा और इससे पहले पढ़ी गई अरदास में जरनैल सिंह भिंडरावाले, बाबा ठारा सिंह और जरनैल सुबेग सिंह को कौम का शहीद करार दिया। इस दौरान खालिस्तान जिंदाबाद के नारे भी लगे और लाल किले पर झंडा फहराने वाले दीप सिद्धू भी समागम में पहुंचे। श्री हरमंदिर साहिब के अंदर खालिस्तान झंडे और अलगाववादी जरनैल सिंह भिंडरावाले के पोस्टर भी दिखाई दिए। प्रशासन ने पूरे अमृतसर की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।
श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कौम के नाम संदेश में कहा कि 37 साल पहले भारत की सेना ने पाकिस्तान और चीन की तरह श्री हरमंदिर साहिब पर टैंकों और तोपों से हमला किया और विजेता सेना की तरह सिखों के साथ व्यवहार किया।
यह हमला सिख कौम की पीठ पर नासूर है, जो भरता है, दर्द देता है और हर साल खालिस्तान जिंदाबाद कह कर हम इस दर्द को कम करने का प्रयास करते हैं। हमें पता है कि इस नसूर का इलाज कैसे करना है। क्या इसकी दवा है और कैसे प्राप्त करना है। 37 साल पहले श्री अकाल तख्त साहिब और देश के विभिन्न हिस्सों में 37 गुरुद्वारों पर हुए हमले में सिख शहीद हुए।
उन्होंने मीडिया से कहा कि वे घल्लूघारे को साका नीला तारा या ब्लू स्टार नहीं लिखें, क्योंकि यह सरकारी भाषा है। घल्लूघारे का अर्थ सर्वनाश होता है और जब मीडिया इसे साका नीला तारा या ब्लू स्टार लिखते हैं तो उन्हें दर्द होता है।
ध्यान सिंह मंड ने भी श्री अकाल तख्त से हुक्मनामा जारी किया और कहा कि घल्लूघारे सिख कौम का मनोबल नहीं तोड़ सके। मंड ने 1984 में श्री दरबार साहिब हमले को लोकतंत्र का बुरका पहन विश्व की तीन ताकतों की मदद से किया गया हमला बताया। बेअदबी मामले में अकाली दल और कांग्रेस दोनों की मिलीभगत स्पष्ट हो गई है और दोनों एक दूसरे को बचाने की कोशिशें कर रहे हैं।
सचखंड श्री हरमंदिर साहिब के अंदर गरम ख्याली सिमरनजीत सिंह मान और दीप सिद्दू भी पहुंचे। सिमरनजीत सिंह मान ने कहा है कि 37 साल से आज का दिन घल्लूघारे के रूप में मना रहे हैं। उन्होंने आज के दिन को खालिस्तान डे बताया।
वहीं इस मौके पर किसान आंदोलन के दौरान लाल किले पर झंडा लहराने वाले दीप सिद्धू ने पत्रकारों से बातचीत की और 37 साल पहले हुए इस घटनाक्रम को निंदनीय बताया। कहा कि जिस तरह से 37 साल पहले बेगुनाह लोगों को मौत के घाट उतारा गया, वह सब अब आगे आ रहा है। सिद्धू ने कहा कि अगर किसान आंदोलन के अंदर हम अपने हक के लिए कोई नारा लगा देते हैं तो हम पर देशद्रोही का टैक लग जाता है। राजनीति का एक ऐसा सिस्टम बन गया है कि आपको कभी भी इंसाफ नहीं लेने दिया जाएगा।
सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
अमृतसर की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। स्थानीय पुलिस के अलावा अमृतसर देहात और पीएपी जालंधर के पुलिस बल की शहर के महत्वपूर्ण स्थानों पर तैनाती की गई है। शहर में लगभग सात हजार जवान तैनात हैं। पुलिस कमिश्नर डॉ. सुखचैन सिंह गिल शहर की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और समय-समय पर बल के सीनियर अधिकारियों के साथ बैठक करके स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं।